धार, अग्निपथ। अमझेरा का भगोरिया इस बार केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक घटना बन गया। शुक्रवार को थाना मैदान पर ऐसा भव्य नजारा दिखा, जो क्षेत्र के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया। सरदारपुर और गंधवानी विधानसभा की सीमा पर बसे अमझेरा नगर में वनग्रामों से आए 110 मादल दलों ने एक साथ मादल की थाप और बांसुरी की धुन पर ‘कुर्राहट’ लगाई। बीते कई वर्षों का यह सबसे बड़ा रिकॉर्ड रहा, जिसका साक्षी हर कोई बना। लोक पर्व का यह दिन अमझेरा के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है।
हेलीकॉप्टर से पहुंचे नेता प्रतिपक्ष और विधायक
भगोरिया की रौनक उस वक्त और बढ़ गई जब नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार और विधायक प्रताप ग्रेवाल हेलीकॉप्टर से सीधे अमझेरा पहुंचे। जैसे ही दोनों जनप्रतिनिधि मैदान में उतरे, माहौल पूरी तरह बदल गया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने खुद ढोल उठाकर मादल बजाया, वहीं सरदारपुर विधायक प्रताप ग्रेवाल ने मादल पर थाप देकर कलाकारों का उत्साह दोगुना कर दिया। इसके बाद कार्यकर्ता, कलाकार और ग्रामीण जमकर थिरके। मैदान में उत्साह और उल्लास का ऐसा संगम दिखा कि हर कोई दंग रह गया।
पारंपरिक वेशभूषा ने मोह लिया सबका मन
उत्सव के दौरान आदिवासी संस्कृति की जीवंत तस्वीर देखने को मिली। वनग्रामों से आई महिलाएं अपनी पारंपरिक और रंग-बिरंगे परिधानों में सजी-धजी नजर आईं। चांदी के भारी आभूषण, सिर पर पारंपरिक सजावट और कदमों की ताल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। चौराहे पर लगे झूलों, चकरी, पारंपरिक व्यंजनों और खिलौनों की दुकानों पर भारी भीड़ उमड़ी, जिससे पूरा नगर मेले के रंग में रंगा नजर आया।
जनप्रतिनिधियों ने किया कलाकारों का सम्मान
इस ऐतिहासिक आयोजन में पहुंचे सभी 110 मादल दलों का भव्य सम्मान किया गया। ग्राम पंचायत सरपंच मनु बाई शिवा मकवाना, जिला पंचायत अध्यक्ष सरदार सिंह मेड़ा, जनपद सदस्य नेहा शुभम दीक्षित, भगवानदास खंडेलवाल, नीलांबर शर्मा, रवि पाठक, शिवा मकवाना, शुभम दीक्षित, धर्मेंद्र मंडलोई और सचिव गोपाल कुमरावत सहित अन्य अतिथियों ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। पहली बार इतनी बड़ी संख्या में दलों का पहुंचना और अनुशासित प्रदर्शन चर्चा का विषय बना रहा।
इस वर्ष के अमझेरा भगोरिया की मुख्य विशेषताएं
दो विधानसभा क्षेत्रों के 110 मादल दलों का एक साथ अद्भुत संगम।
पहली बार हेलीकॉप्टर के माध्यम से जनप्रतिनिधियों का आगमन।
मादल, बांसुरी और पारंपरिक कुर्राहट से गूंजता हुआ विशाल मैदान।
आदिवासी संस्कृति का अत्यंत भव्य और अनुशासित प्रदर्शन।
