पान मसाला और तंबाकू के दामों में उछाल: छापेमारी और बजट के संकेतों से बाजार में हलचल

उज्जैन, अग्निपथ। इंदौर और उज्जैन के पान मसाला कारोबारियों पर हाल ही में हुई छापेमारी तथा आगामी बजट में इनके दाम बढ़ने के संकेतों ने बाजार का गणित बिगाड़ दिया है। शहर में पान मसाला और तंबाकू पाउच की कीमतों में अचानक उछाल आने से ग्राहकों और छोटे दुकानदारों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बाजार में चर्चा है कि पानबहार और राजश्री जैसे बड़े ब्रांड्स के दाम बढ़ गए हैं, जबकि विमल और बाहुबली जैसे कुछ ब्रांड फिलहाल पुराने रेट पर ही उपलब्ध बताए जा रहे हैं।

पुराने स्टॉक को महंगे दामों पर बेचने का खेल

दौलतगंज के थोक व्यापारियों से माल खरीदने वाले फुटकर विक्रेताओं का कहना है कि कंपनियों ने आधिकारिक तौर पर अभी रेट नहीं बढ़ाए हैं। हालांकि, माल की डिलीवरी में हो रही देरी का फायदा उठाकर थोक व्यापारियों ने अपने पास रखे पुराने स्टॉक को ऊंचे दामों पर बेचना शुरू कर दिया है। जानकारों का मानना है कि कंपनियां या तो पाउच के दाम बढ़ाएंगी या फिर वजन कम करेंगी। इसी बदलाव के चलते फिलहाल सप्लाई रोककर नया पैक तैयार करने का काम चल रहा है। इस कृत्रिम कमी के कारण शौकीनों को 5 रुपये वाला पाउच 6 रुपये में और 10 रुपये वाला पाउच 12 रुपये में खरीदना पड़ रहा है।

छोटे दुकानदारों और ग्राहकों के बीच बढ़ रहा विवाद

सप्लाई की दोहरी व्यवस्था का सीधा असर छोटे दुकानदारों पर पड़ रहा है। थोक में माल महंगा मिलने के कारण वे मजबूरन ग्राहकों से 2 से 5 रुपये तक अतिरिक्त वसूल रहे हैं। इससे दुकानदारों को ग्राहकों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है। दौलतगंज के कई व्यापारियों ने तो अपनी दुकान के बाहर टेबल-कुर्सी लगाकर सीधे महंगे दामों पर फुटकर बिक्री शुरू कर दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि थोक स्तर पर ही अधिक दर वसूली जा रही है, तो इसकी जवाबदेही सप्लाई चेन पर तय होनी चाहिए, क्योंकि अक्सर कार्रवाई का गाज छोटे दुकानदारों पर ही गिरती है।

प्रशासनिक मौन से बढ़ रही कालाबाजारी

हैरानी की बात यह है कि बाजार में मची इस लूट को लेकर प्रशासन पूरी तरह मौन है। अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा गरीब और मध्यम वर्ग को भुगतना पड़ रहा है। 1 या 2 रुपये अतिरिक्त देने पर जब दुकानदार ग्राहकों को चिल्लर थमाते हैं, तो वह बाजार में आसानी से नहीं चलती, जिससे विवाद की स्थिति बनती है। नागरिकों की मांग है कि प्रशासन को अधिकृत थोक दर और एमआरपी की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही बाजार का निरीक्षण कर कालाबाजारी करने वाले बड़े व्यापारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा हो सके।

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