चंपत राय पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तार करो : दिग्विजय सिंह

उज्जैन में वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने किए महाकाल दर्शन

उज्जैन, अग्निपथ। मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ काग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने शनिवार को उज्जैन में महाकाल के दर्शन किए। उन्होंने गर्भगृह के बाहर से बाबा का आशीर्वाद लिया। चांदीगेट से खड़े होकर हाथ जोड़े व पुजारियों के हाथों जल चढ़वाया। पुजारी संजय शर्मा ने उनका पूजन संपन्न कराया। 

मीडिया से चर्चा में दिग्विजय सिंह ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर में दान चोरी के मामले में आरोपित ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को एफआईआर दर्ज कर शीघ्र गिरफ्तार कर लेना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा इस ट्रस्ट का गठन स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था, इसलिए इसकी पूरी जिम्मेदारी भी उन्हीं की है। दिग्विजय सिंह शुक्रवार को देर रात उज्जैन पहुंचे थे। देवास रोड स्थित सर्किट हाउस में विश्राम के बाद सुबह उन्होंने पत्रकारों से चर्चा की। 

राम मंदिर में दान चोरी के मुद्दे  को लेकर शहर से गांव तक जाएंगे

दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस राम मंदिर में दान चोरी के मुद्दे को शहर-शहर और गांव-गांव लेकर जाएंगे। उन्होंने बताया कि उज्जैन जिले की 609 पंचायतों में कांग्रेस ने दल और मंडल स्तर पर समितियां बनाई हैं, जो घर-घर जाकर लोगों को इस मामले की जानकारी देंगी। महाकाल मंदिर की व्यवस्था पर हमला बोलते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे उस समय से विरोध कर रहे हैं, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा ने महाकाल मंदिर की जमीन आरएसएस से जुड़ी संस्था को दे दी थी।

उन्होंने दावा किया कि इस मामले में वे अदालत भी गए थे। उन्होंने पत्रकारों को इसके कुछ फाइलें और दस्तावेज भी दिखाए।

मेट्रोपॉलिटन रीजन के नाम में पहले इंदौर होना चाहिए था

दिग्विजय सिंह ने कहा कि उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन के नामकरण को लेकर चल रहे विवाद पर भी कहा कि इसमें इंदौर का नाम पहले होना चाहिए था। दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को सलाह देते हुए कहा कि इतने विभाग आपके पास हैं, गड़बड़ी अधिकारी करेंगे और जवाब आपको देना पड़ेगा। ऐसा मत करिए, क्योंकि हम आपको छोड़ने वाले नहीं हैं।

दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा प्रतिष्ठा के दौरान एक कुंवारा और एक तलाकशुदा व्यक्ति पूजन में बैठ गया, जबकि परंपरा अनुसार सपत्नीक पूजन होना चाहिए था।

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