राजस्व अधिकारियों ने सुरक्षा और सम्मान के लिए उठाई आवाज: कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

नलखेड़ा, अग्निपथ। मध्य प्रदेश राजस्व अधिकारी संघ ने वर्तमान समय में राजस्व न्यायालयों में पीठासीन अधिकारियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार और अनैतिक दबाव के विरोध में कलेक्टर प्रीति यादव को एक ज्ञापन सौंपा है। गुरुवार को दिए गए इस ज्ञापन में संघ के सदस्यों ने प्रदेश भर में राजस्व अधिकारियों के प्रति बढ़ते असुरक्षा के भाव और अपमानजनक घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संघ ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के व्यवहार से न केवल अधिकारियों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि न्याय व्यवस्था की गरिमा भी धूमिल हो रही है।

उमरिया और सुसनेर की घटनाओं का दिया हवाला

ज्ञापन में हाल की कुछ गंभीर घटनाओं का उल्लेख किया गया है। उमरिया जिले की चंदिया तहसील में एक पीठासीन अधिकारी पर अभिभाषक द्वारा हमले और गलत फैसला सुनाने के लिए दबाव बनाने की घटना का जिक्र किया गया। इसी तरह, आगर मालवा जिले के सुसनेर अनुविभाग में अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) सर्वेश यादव पर भी एक आदेश को लेकर अनैतिक दबाव बनाने का प्रयास किया गया। संघ का आरोप है कि जिले की विभिन्न तहसीलों और टप्पा न्यायालयों में तहसीलदार व नायब तहसीलदारों के साथ अमर्यादित व्यवहार कर अवैध रूप से दबाव बनाया जा रहा है।

फर्जी वेशभूषा और गुमनाम शिकायतों पर कार्रवाई की मांग

राजस्व अधिकारियों ने कलेक्टर को बताया कि क्षेत्र में कुछ लोग बिना किसी सनद (वकालत के लाइसेंस) के वकीलों की वेशभूषा पहनकर न्यायालयीन प्रकरणों में दखल देने और पैरवी करने का प्रयास करते हैं। ये लोग गुमनाम और फर्जी पतों से शिकायतें कर अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। संघ ने मांग की है कि ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए ताकि पीठासीन अधिकारी बिना किसी भय के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।

ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें

राजस्व अधिकारी संघ ने प्रशासन के समक्ष अपनी सुरक्षा और संसाधनों को लेकर निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  • निष्पक्ष जांच और सुरक्षा: सुसनेर एसडीएम के खिलाफ की गई शिकायत की निष्पक्ष जांच हो और सभी राजस्व अधिकारियों को सुरक्षा के लिए होमगार्ड जवान उपलब्ध कराए जाएं।
  • प्रशासनिक सुधार: न्यायिक और गैर-न्यायिक तहसीलदार का विभाजन समाप्त किया जाए। जो अधिकारी न्यायालयीन कार्य नहीं करना चाहते, उन्हें स्वेच्छा से अन्य प्रशासनिक कार्य सौंपे जाएं।
  • संसाधनों की उपलब्धता: ‘ई-ऑफिस’ के कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रत्येक तहसील में पृथक कंप्यूटर और ऑपरेटर की व्यवस्था की जाए।
  • पुराने प्रस्तावों का निराकरण: राजस्व अधिकारियों के विरुद्ध बिना प्राकृतिक न्याय और एसीएन (ACN) दिए भेजे गए पुराने प्रस्तावों को नस्तीबद्ध किया जाए।

ज्ञापन सौंपते समय मध्य प्रदेश राजस्व अधिकारी संघ के तमाम सदस्य उपस्थित रहे और उन्होंने अपनी मांगों के निराकरण के लिए शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा की है।

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