कांग्रेस पार्षद ने वक्फ बोर्ड की संपत्ति का नियम विरूद्ध करवाया नामांतरण

वक्फ बोर्ड की संपत्ति

11 अपात्रों को दिलवाया प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ, जांच हुई तो खुला फर्जीवाड़ा

धार, अग्निपथ। प्रधानमंत्री आवास योजना भ्रष्टाचार का नया जरिया बनती जा रही है। पहले ग्रामीण और अब नगरीय क्षेत्र की योजना में भी गड़बड़ी और नियम विरूद्ध लाभ पहुंचाने का मामला सामने आया है। नगर परिषद डही के वार्ड-5 में कांग्रेस पार्षद हिसामुद्दीन कुरैशी द्वारा 21 हितग्राहियों को फर्जी तरीके से वक्फ बोर्ड की संपत्ति का नामांतरण करवाकर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाया गया। जांच के बाद 11 हितग्राहियों को अपात्र ठहराया गया।

इस फर्जीवाड़े की शिकायत 10 जून को राहुल विस्के और भारतसिंह तड़वाल ने एसडीएम कुक्षी को की थी। शिकायत की जांच जिला शहरी विकास अभिकरण (डूडा) के परियोजना अधिकारी (पीओ) धार द्वारा की गई जांच के प्रतिवेदन अनुसार कच्चे व पक्के मकान के आधार पर 21 में से 11 अपात्र हितग्राहियों के लिए प्रधानमंत्री आवास की अनुशंसा कर दी गई है। लाभ मिलने के बाद पीओ डूडा ने अगस्त में सीएमओ नगर परिषद डही को पत्र जारी कर संबंधित अपात्र लोगों को नोटिस देकर उनका जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा था।

वक्फ बोर्ड की है जमीन

जांच में पाया गया कि पार्षद हिसामुद्दीन पिता सलामुद्दीन कुरैशी एहले सुन्नत वल जमात डही समाज के सदर है। कुरैशी ने 21 लोगों को हिबानामा यानी प्रदान पत्र कर भूमि अंतरित की। यह भूमि राजस्व रिकार्ड में खसरा नंबर 242/1/1 रकबा 10.801 हेक्टेयर सरकारी होकर वक्त संपत्ति में मस्जिद, मदरसा, मस्जिद दाऊद बोहरा समाज, जमातखाना, कुआं, पक्का मुस्लिम पंचकुआं, कन्या मावि, पुलिस थाना, पशु चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सडक़ व छात्रावास के लिए दर्ज है।

नप के रिकार्ड में 3780 वर्ग फीट भूमि

वहीं नगर परिषद के संपत्ति रिकार्ड में सदर मुस्लिम जमात खुली भूमि के नाम से 3780 वर्ग फीट भूमि दर्ज है। मुस्लिम विधि नियम 173 हिबा के आवश्यक तत्व में हिबा यानी प्रदान पत्र किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को किया जाना चाहिए। मुस्लिम विधि में उल्लेखित टिप्पणी कंपेंडियन ऑफ इस्लामिक लॉज की धारा 370 के अनुसार दाता भूमि का स्वामी होना चाहिए।

लेकिन सदर हिसामुद्दीन कुरैशी जमात का अध्यक्ष है ना कि भूमि की स्वामी है। बावजूद हिबानामा करवाने के बाद नगर परिषद डही में नामांतरण करवा लिया गया। इसमें नामांतरण प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया। कई फाइलों पर तत्कालीन सीएमओ के साइन नहीं है। नामांतरण परिषद द्वारा स्वीकृत नहीं किया गया।

जिन्हें आवास मिला, उनके पहले से मकान

जांच में यह भी पाया कि 21 मुस्लिम परिवारों को पीएम आवास स्वीकृत हुए है, लेकिन उनके पूर्व से ही पक्के मकान थे। पीएम आवास में लाभ दिलाने के चक्कर में सरकारी प्रक्रिया का पालन तक नहीं हुआ। नगर परिषद के राशन कार्ड जारी रजिस्टर में उल्लेखित 21 लोगों पर जारी राशनकार्ड की तारीख रजिस्टर में नहीं लिखी। न ही जारी वर्ष की जानकारी है।

कई राशनकार्ड में पति-पत्नी के नाम एक ही कार्ड में नहीं लिखे मिले। जावक रजिस्टर में जावक क्रमांक अंकित कर बाकी कॉलम खाली छोड़ दिए गए।दायरा रजिस्टर में 21 लोगों का नामांतरण एक साथ दर्ज है।

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