3 घंटे तक थम गया मुख्य बाजार
महिदपुर (उज्जैन)। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिला अंतर्गत महिदपुर तहसील मुख्यालय पर शुक्रवार को एक अभूतपूर्व हंगामा देखने को मिला। यहाँ के गांधी मार्ग स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (शा. कन्या उमावि) के प्राचार्य अर्जुन सिंह दावरे के अचानक किए गए स्थानांतरण (तबादला) के विरोध में स्कूल की सैकड़ों छात्राएं लामबंद हो गईं। छात्राओं ने प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ न केवल आवाज उठाई, बल्कि विद्यालय परिसर से बाहर निकलकर मुख्य बाजार की सड़कों पर चक्काजाम कर दिया।
करीब 3 घंटे तक चले इस प्रभावी और आक्रोशित प्रदर्शन के कारण पूरे महिदपुर शहर की रफ्तार थम गई और मुख्य मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
तबादले की खबर मिलते ही छाई मायूसी, फिर फूटा गुस्सा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह जैसे ही शासकीय कन्या शाला में सामान्य दिनों की तरह स्कूल की घंटी बजी और छात्राएं अपनी कक्षाओं में पहुँचीं, वैसे ही उन्हें एक ऐसी खबर मिली जिसने पूरे परिसर में मायूसी फैला दी। छात्राओं को पता चला कि उनके लोकप्रिय और अनुशासित प्राचार्य अर्जुन सिंह दावरे का तबादला महिदपुर से काफी दूर देवास जिले में कर दिया गया है।
यह खबर फैलते ही छात्राओं के बीच असंतोष की लहर दौड़ गई। छात्राओं का कहना था कि प्राचार्य श्री दावरे के कार्यकाल में विद्यालय के शैक्षणिक स्तर में सुधार हुआ था और वे छात्राओं की समस्याओं को लेकर हमेशा गंभीर रहते थे।
इस प्रशासनिक निर्णय से आहत होकर कुछ ही देर में छात्राओं का यह असंतोष उग्र विरोध प्रदर्शन में बदल गया। छात्राएं एकत्रित होकर विद्यालय परिसर के बाहर आ गईं और मुख्य मार्ग (पुराना बस स्टैंड के समीप) पर धरने पर बैठ गईं।
सड़कों पर बैठीं छात्राएं, प्रशासन के खिलाफ जमकर की नारेबाजी
हाथों में तख्तियां और बैनर लिए बिना छात्राओं ने मुख्य सड़क को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया। छात्राएं प्राचार्य श्री दावरे के स्थानांतरण को तत्काल निरस्त करने की मांग को लेकर प्रशासन और शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगीं। चूंकि प्रदर्शन पुराना बस स्टैंड और गांधी मार्ग जैसे व्यस्ततम इलाके में हो रहा था, इसलिए देखते ही देखते मुख्य मार्ग के दोनों ओर वाहनों का लंबा जाम लग गया। बाजार में व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित होने लगीं।
प्रदर्शनकारी छात्राओं में आक्रोश तब और ज्यादा बढ़ गया, जब जाम लगने के काफी देर बाद तक भी शिक्षा विभाग, पुलिस या स्थानीय प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी उनकी सुध लेने या उनकी बात सुनने नहीं पहुँचा। छात्राओं का आरोप था कि संवेदनशील मामलों में भी प्रशासनिक अमला लापरवाही बरत रहा है।
2 घंटे बाद पहुँचे अधिकारी, तीखी जद्दोजहद के बाद सौंपा ज्ञापन
चक्काजाम और बढ़ते हंगामे की सूचना जब आला अधिकारियों तक पहुँची, तब जाकर करीब 2 घंटे के बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) किशोर परमार एवं रामेश्वर सोनी भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे। अधिकारियों ने छात्राओं के बीच पहुँचकर उन्हें समझाने और चक्काजाम समाप्त करने का प्रयास किया।
इस दौरान अधिकारियों और आक्रोशित छात्राओं के बीच लंबी जद्दोजहद चली। छात्राएं इस बात पर अड़ी रहीं कि जब तक तबादला आदेश रद्द करने का लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे सड़क से नहीं हटेंगी। अधिकारियों ने छात्राओं को समझाते हुए कहा कि स्थानांतरण एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन वे उनकी भावनाओं और मांग को उच्च अधिकारियों तक जरूर पहुँचाएंगे।
अधिकारियों के काफी समझाने और मुस्तैद पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद छात्राएं शांत हुईं। इसके बाद छात्राओं ने कलेक्टर उज्जैन एवं जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के नाम एक संयुक्त ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा।
छात्राओं की दोटूक चेतावनी: तबादला निरस्त नहीं हुआ तो होगा उग्र आंदोलन
ज्ञापन सौंपने के बाद छात्राओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अर्जुन सिंह दावरे का तबादला महिदपुर से देवास किया जाना दुर्भावनापूर्ण या अनुचित है, जिसे तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए। छात्राओं ने मीडिया और प्रशासन के समक्ष यह स्पष्ट कर दिया कि यदि समय रहते प्रशासन ने उनकी जायज मांग को स्वीकार नहीं किया और प्राचार्य का तबादला आदेश वापस नहीं लिया, तो वे दोबारा सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगी।
छात्राओं के अनुसार, अगला प्रदर्शन इससे भी बड़ा, व्यापक और उग्र होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग की होगी। इस आश्वासन और चेतावनी के बाद करीब 3 घंटे से जारी चक्काजाम समाप्त हुआ और यातायात बहाल हो सका।
