उज्जैन। आगामी सिंहस्थ महापर्व को लेकर शहर में बड़े पैमाने पर विकास कार्यों का दौर तेजी से जारी है। इन महात्वाकांक्षी परियोजनाओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने के लिए अब तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।
शहर में पंद्रह हजार करोड़ रुपए की भारी लागत से चल रहे निर्माण कार्यों को समय सीमा में पूरा करने का लक्ष्य है। इसी कड़ी में सिंहस्थ मेला कार्यालय में दो दिवसीय विशेष तकनीकी प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत की गई है।
आईआईटी विशेषज्ञों के हाथों में गुणवत्ता और सुरक्षा की कमान
मेला कार्यालय में आयोजित इस अहम शिविर में देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी मुंबई के विशेषज्ञ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये विशेषज्ञ स्थानीय इंजीनियरों और साइट सुपरवाइजरों को सुरक्षित निर्माण की बारीकियां सिखा रहे हैं।
आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर अल्बर्ट और प्रोफेसर वरुण कुमार ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का जिम्मा संभाला है। वे निर्माण स्थलों पर साइट प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षा के आधुनिक पहलुओं पर गहन मार्गदर्शन दे रहे हैं।
पहले चरण में सौ से अधिक इंजीनियरों को मिल रहा मार्गदर्शन

इस विशेष अभियान के पहले चरण में शहर के सौ से अधिक इंजीनियरों और सुपरवाइजरों को मास्टर क्लास दी जा रही है। शिविर के उद्घाटन के दिन लगभग पचास इंजीनियरों ने विशेषज्ञों से साइट मैनेजमेंट के सुरक्षित तरीके सीखे।
इन तकनीकी सत्रों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारी निर्माण कार्यों के दौरान किसी भी तरह की संरचनात्मक खामी न रहे। विशेषज्ञों ने इंजीनियरों को आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल और संभावित खतरों से निपटने की रणनीति भी बताई।
मजदूरों की सुरक्षा के लिए दूसरे चरण में चलेगा खास अभियान
इंजीनियरों के बाद अब उन लोगों पर फोकस किया जाएगा जो असल में जमीनी स्तर पर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। प्रशिक्षण के दूसरे चरण में निर्माण स्थलों पर काम करने वाले सभी श्रमिकों को भी अनिवार्य रूप से ट्रेनिंग दी जाएगी।
मजदूरों को काम के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और सुरक्षा उपकरणों के सही इस्तेमाल से जुड़े जरूरी उपाय सिखाए जाएंगे। यह प्रशिक्षण शिविर प्रतिदिन सुबह साढ़े नौ से शाम साढ़े पांच बजे तक संचालित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश, किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं
सिंहस्थ के इन बड़े प्रोजेक्ट्स पर सरकार की सीधी नजर है और सुरक्षा को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों में पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
प्रशासन का प्रयास है कि इन करोड़ों के प्रोजेक्ट्स में गति के साथ गुणवत्ता से कोई भी समझौता न हो। सरकार की मंशा है कि बाहर से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए एक सुरक्षित और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो।
सौ से ज्यादा सक्रिय साइट्स पर मंडराते जोखिम को कम करने की कवायद
वर्तमान में पूरे शहर के भीतर और बाहरी हिस्सों में सौ से अधिक निर्माण स्थलों पर एक साथ काम चल रहा है। इतनी बड़ी संख्या में प्रोजेक्ट्स चलने के कारण साइट्स पर दुर्घटनाओं का जोखिम भी स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।
हर निर्माण साइट की तकनीकी और भौगोलिक जरूरतें अलग-अलग होती हैं, जिन्हें सिर्फ ठेकेदारों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इसी बड़ी जटिलता को देखते हुए देश की सर्वोच्च संस्था आईआईटी की मदद ली जा रही है ताकि जोखिम कम हो।
समयबद्ध पूर्णता और जीरो एक्सीडेंट का रखा गया प्रमुख लक्ष्य
प्रशासनिक अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम अब एक साझा रणनीति के तहत जमीनी स्तर पर काम कर रही है। मुख्य लक्ष्य यह है कि सिंहस्थ की हर छोटी-बड़ी परियोजना बिना किसी दुर्घटना के तय समय सीमा में पूरी हो जाए।
इस तरह के प्रशिक्षण से ना सिर्फ काम की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि लंबे समय तक टिकने वाले मजबूत स्ट्रक्चर भी तैयार होंगे। उज्जैन का यह विकास मॉडल अन्य शहरों के लिए भी सुरक्षित निर्माण का बेहतरीन उदाहरण पेश करेगा।

