केंद्र के समान महंगाई भत्ता नहीं मिलने पर सरकार के खिलाफ रोष
भोपाल, अग्निपथ। मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारी राज्य सरकार द्वारा महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देने में हो रही लगातार देरी से बेहद नाराज हैं और उन्होंने इस वर्ष काली दिवाली मनाने का निर्णय लिया है। कर्मचारियों का कहना है कि केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को छह महीने पहले से बढ़ी हुई दर पर भत्ता दे रही है, जबकि मध्यप्रदेश में पिछले दस महीनों से उनकी लगातार अनदेखी की जा रही है। वर्तमान में राज्य के कर्मचारियों को कम दर पर ही भत्ता मिल रहा है, जबकि केंद्र सरकार त्योहारों से पहले भत्ते में और अधिक वृद्धि करने की तैयारी कर रही है।
सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर उठाए सवाल और एरियर की मांग
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने राज्य सरकार के वित्तीय खर्च पर कड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि कर्मचारियों का दो प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने और दस महीने का एरियर देने पर सरकार पर केवल सात सौ करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि सरकार विभिन्न योजनाओं के तहत बड़ी राशि खर्च कर रही है, लेकिन साढ़े सात लाख कर्मचारियों और साढ़े चार लाख पेंशनर्स के परिवारों के हितों की अनदेखी की जा रही है। महंगाई सभी नागरिकों के लिए समान रूप से बढ़ रही है, इसलिए भत्तों में भी समानता होनी चाहिए।
अधिकारियों को लाभ और अन्य कर्मचारियों में आक्रोश
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि प्रदेश के अखिल भारतीय सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों को तो केंद्र के समान बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता दे दिया गया है, लेकिन अन्य कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया है। गैस सिलेंडर, पेट्रोल, डीजल तथा दूध, चावल, शक्कर और दाल जैसी आवश्यक वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ने से कर्मचारियों का मासिक बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। अपनी इन जायज मांगों को सरकार तक पहुँचाने के लिए कर्मचारियों ने डाक भवन के सामने जोरदार प्रदर्शन किया तथा चेतावनी दी कि यदि दिवाली से पहले दो प्रतिशत भत्ता नहीं बढ़ाया गया तो वे मजबूरन काली दिवाली मनाएंगे।

