धार। सालों पुराने विवाद में सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद शुक्रवार को धार की ऐतिहासिक भोजशाला में एक नया विवाद खड़ा हो गया। प्रशासन ने जुमे की नमाज के लिए वैकल्पिक जगह तो तय कर दी, लेकिन मुस्लिम समुदाय ने वहां नमाज पढ़ने से साफ इनकार कर दिया।
दिनभर चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और असमंजस के कारण जुमे की नमाज का तय वक्त बिना इबादत के ही निकल गया और मुस्लिम पक्ष प्रशासन से लगातार बातचीत में उलझा रहा। दूसरी तरफ, हिंदू समाज ने सुबह से ही भोजशाला के अंदर अपनी नियमित पूजा-अर्चना पूरी कर ली।
मालीवाड़ा में वैकल्पिक जमीन, दूरी बनी असहमति की मुख्य वजह
सुप्रीम कोर्ट से आदेश की कॉपी मिलते ही जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया था। प्रशासन ने नमाज के लिए ग्राम मालीवाड़ा में सर्वे क्रमांक 664 की जमीन को चिन्हित कर वहां साफ-सफाई का काम भी शुरू करवा दिया था।
यह चिन्हित जगह भोजशाला से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर है, जो कि प्रसिद्ध चालीस पीर दरगाह के ठीक सामने स्थित है। मुस्लिम समुदाय ने इतनी दूर और इस नई जगह पर जाने से खुली असहमति जताते हुए प्रशासन के प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
तनाव टालने के लिए परिसर में कड़ी सुरक्षा
मुस्लिम पक्ष के इनकार के बावजूद भोजशाला उत्सव समिति ने सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले का खुले दिल से स्वागत किया है। समिति के सदस्यों का मानना है कि शीर्ष अदालत के इस कदम से ऐतिहासिक परिसर की पवित्रता और शांति बनी रहेगी।
इस बीच किसी भी तरह के सांप्रदायिक तनाव से निपटने के लिए पूरे भोजशाला परिसर को पुलिस ने एक छावनी में तब्दील कर दिया है। चप्पे-चप्पे पर भारी सुरक्षा बल तैनात है और शहर में शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए प्रशासन कड़ी निगरानी कर रहा है।
कलेक्टर का कड़ा रुख, शहर की कानून-व्यवस्था प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता
धार के जिला कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने इस पूरी संवेदनशील स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कानूनी अध्ययन करने के बाद ही प्रशासन ने वैकल्पिक जगह तय करने का यह अहम कदम उठाया था।
कलेक्टर मीणा ने साफ लहजे में कहा कि प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता शहर में कानून-व्यवस्था और आपसी सौहार्द हर हाल में बनाए रखना है। इसके लिए पुलिस और प्रशासन हर जरूरी और सख्त कदम उठाने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है।
सुप्रीम कोर्ट की दो टूक: भोजशाला में अब सिर्फ होगी मां वाग्देवी की पूजा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज के लिए एक अलग और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराए। कोर्ट ने भोजशाला सरस्वती मंदिर परिसर के भीतर मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने की इजाजत देने से साफ इनकार कर दिया है।
वहीं, हिंदू पक्ष के लिए एक बड़ी राहत देते हुए कोर्ट ने कहा है कि भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां वाग्देवी की नियमित पूजा-अर्चना बेरोकटोक जारी रहेगी। हिंदू पक्ष के हक में दिए गए इंदौर हाई कोर्ट के फैसले पर भी रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट मना कर दिया है।
एएसआई के वैज्ञानिक सर्वे और मूल ढांचे से छेड़छाड़ पर अदालत की सख्त पाबंदी
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को भी सख्त हिदायत दी है। कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, एएसआई बिना अदालत की पूर्व अनुमति के भोजशाला के मूल ढांचे में किसी भी प्रकार का बदलाव या तोड़फोड़ बिल्कुल नहीं कर सकता है।
यह पूरा विवाद इंदौर हाई कोर्ट में दायर उस मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें एएसआई की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर इस ऐतिहासिक इमारत को मंदिर माना गया था। इसी बड़े फैसले के बाद से यहां जुमे की नमाज पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी।
5 अगस्त को होगी मामले की अंतिम सुनवाई, पूरे शहर को अगले फैसले का इंतजार
मुस्लिम पक्ष हाई कोर्ट के इसी आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। कोर्ट ने अब सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिए हैं और इस अति संवेदनशील मामले की अगली और अंतिम सुनवाई के लिए 5 अगस्त 2026 की तारीख मुकर्रर की है।
आने वाले दिनों में इस मामले का क्या कानूनी रुख होगा, इसे लेकर अब पूरे शहर और दोनों समुदायों की निगाहें 5 अगस्त को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई हैं। फिलहाल धार में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन प्रशासन के नियंत्रण में है।

