उज्जैन। चिमनगंज कृषि उपज मंडी में किसानों की फसल बिकने के बजाय अब बुलेट गाड़ियां चमचमाती नजर आएंगी। मंडी प्रशासन के कथित संरक्षण में नियमों को ताक पर रखकर यहां एक आलीशान दो मंजिला बुलेट शोरूम का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है।
हाल ही में इस विवादित शोरूम की छत का काम भी पूरा कर लिया गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसका मुख्य गेट पीछे की ओर मोहन नगर की सड़क पर खोलने की तैयारी है, जिसका स्थानीय लोग लगातार पुरजोर विरोध कर रहे हैं।
छोटे गैरेज संचालकों पर गिरी गाज, बड़े रसूखदार को मिला अभयदान
नियमानुसार कृषि मंडी प्रांगण के भीतर सिर्फ अनाज, कीटनाशक, बीज और सिंचाई पाइप जैसी कृषि से जुड़ी सामग्री का ही कारोबार किया जा सकता है। इसके अलावा किसी भी अन्य व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति देना मंडी मैन्युअल के सख्त खिलाफ माना जाता है।
इसके बावजूद परिसर में वर्षों से बड़े पैमाने पर निजी वाहनों के गैरेज संचालित हो रहे थे। पिछले दिनों मंडी सचिव संजय गोयल का एक गैरेज संचालक से तीखा विवाद हो गया था, जिसके बाद गरीब दुकानदारों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई।
इस कार्रवाई के तहत मंडी प्रशासन ने आधा दर्जन से अधिक गरीब गैरेज संचालकों की दुकानें बंद करवाकर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। एक तरफ जहां छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी छीन ली गई, वहीं दूसरी तरफ बुलेट शोरूम संचालक पर अफसर मेहरबान हैं।
मंडी के जिम्मेदार अधिकारियों की मूक सहमति के कारण ही यह अवैध निर्माण तेजी से पूरा हो गया। रसूख के दम पर कुछ बड़े गैरेज अब भी अंदर गुपचुप तरीके से चल रहे हैं, जिन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
नगर निगम की अनुमति के बिना बना शोरूम, खुलेआम उड़ रहीं नियमों की धज्जियां
इस दो मंजिला इमारत के निर्माण को लेकर नगर निगम के अधिकारियों ने किसी भी तरह की मंजूरी देने से साफ इनकार किया है। निगम के बिल्डिंग इंस्पेक्टर राजकुमार राठौर ने स्पष्ट किया है कि उनके विभाग ने इस बुलेट शोरूम को कोई परमिशन नहीं दी है।
उनके मुताबिक, यह निर्माण पूरी तरह मंडी प्रशासन की आपसी अनुमति के भरोसे ही किया जा रहा है। बिना निगम की मंजूरी के इतनी बड़ी व्यावसायिक इमारत खड़ी हो जाना मंडी प्रशासन और भू-माफियाओं की गहरी सांठगांठ को खुलेआम उजागर करता है।
प्रशासन की इस दोहरी नीति के कारण मंडी के छोटे व्यापारियों और नागरिकों में गहरा असंतोष पनप रहा है। लोगों का कहना है कि नियमों का यह खुला उल्लंघन बड़े भ्रष्टाचार की ओर साफ इशारा करता है।
मोहन नगर मार्ग पर खुले गेट से टैक्स चोरी का खुला खेल, रहवासी परेशान
विवाद की असली जड़ इस शोरूम में बनाए जा रहे दो गेट हैं, जिनमें से एक मंडी की तरफ और दूसरा मोहन नगर की सड़क पर खुलता है। इस रास्ते का फायदा उठाकर कई बड़े अनाज व्यापारियों ने भी अपने गोदामों के पिछले गेट वहां खोल लिए हैं।
यहीं से रोजाना दर्जनों ट्रकों में अनाज लादकर बिना मंडी टैक्स चुकाए गुपचुप तरीके से बाहर भेजा जा रहा है। इस गुप्त रास्ते से हो रही सीधी सप्लाई के कारण मंडी प्रशासन को हर महीने लाखों रुपये के राजस्व का बड़ा चूना लग रहा है।
मोहन नगर के स्थानीय निवासियों ने जब इस अवैध रास्ते और ट्रकों की धमाचौकड़ी का विरोध किया, तो मंडी प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। अफसरों ने आम जनता को राहत देने के बजाय पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना रुख अपना लिया।
मंडी के जिम्मेदारों ने निगम अधिकारियों से साफ कह दिया कि यदि रहवासियों को परेशानी है, तो वे खुद वहां बाउंड्रीवॉल बना लें। प्रशासन का यह रवैया दिखाता है कि वे नियमों का उल्लंघन करने वालों के साथ खड़े हैं।
