उज्जैन। जिले में साइबर अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं और अब वे सीधे सरकारी कर्मचारियों को अपना शिकार बना रहे हैं। ताजा मामला उन्हेल थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक महिला स्वास्थ्य अधिकारी को ठगों ने अपने जाल में फंसा लिया।
ग्राम पासलोद स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र पर पदस्थ कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) टीना पाल इस सुनियोजित ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हुई हैं। जालसाज ने खुद को प्रशासनिक अधिकारी बताकर उनके बैंक खाते से लगभग 60 हजार रुपये की भारी भरकम रकम पार कर दी।
कलेक्टर ऑफिस के नाम से आया था फर्जी फोन कॉल
पीड़ित सीएचओ टीना पाल ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में बताया कि पूरी घटना गुरुवार 16 जुलाई की है। उनके मोबाइल पर एक नंबर (8290846354) से कॉल आया, जिसमें फोन करने वाले व्यक्ति ने बेहद आत्मविश्वास के साथ बात की।
कॉलर ने अपना परिचय उज्जैन कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ नायब तहसीलदार अशोक मीणा के रूप में दिया था। सरकारी ओहदे का नाम सुनते ही महिला अधिकारी को जरा भी शक नहीं हुआ और वह उसकी बातों में पूरी तरह से उलझती चली गईं।
शौचालय निर्माण और सुविधाओं के नाम पर बुना गया जाल
इस शातिर ठग ने बातों ही बातों में उप स्वास्थ्य केंद्र की बुनियादी सुविधाओं, विशेषकर भवन और शौचालय निर्माण के संबंध में जानकारी मांगनी शुरू कर दी। उसने झांसा दिया कि शासन की तरफ से स्वास्थ्य केंद्र के विकास कार्यों के लिए फंड जारी किया जा रहा है।
बातचीत के दौरान जालसाज ने सीएचओ को बताया कि उनके केंद्र के लिए 40 हजार रुपये की सरकारी अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। उसने विश्वास दिलाया कि यह पूरी रकम सीधे तौर पर अधिकारी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाने वाली है।
10 रुपये के वेरिफिकेशन से शुरू हुआ असली खेल
ठगी की वारदात को अंजाम देने के लिए अपराधी ने एक बेहद सोची-समझी रणनीति अपनाई। उसने महिला अधिकारी से कहा कि सरकारी फंड भेजने से पहले बैंक खाते का वेरिफिकेशन करना जरूरी है, ताकि पैसे किसी गलत जगह या दूसरे अकाउंट में न चले जाएं।
कॉलर ने विश्वास जीतने के लिए सबसे पहले 10 रुपये की छोटी सी रकम सीएचओ के खाते में ट्रांसफर की और उसे चेक करने को कहा। उसने कहा कि वेरिफिकेशन सफल होने के बाद वह बची हुई 39,990 रुपये की राशि भी भेज रहा है।
फर्जी स्क्रीनशॉट भेजकर पैदा किया गया भारी भ्रम
जैसे ही महिला ने 10 रुपये मिलने की पुष्टि की, ठग ने उन्हें गुमराह करने के लिए तुरंत 69,990 रुपये ट्रांसफर होने का एक फर्जी स्क्रीनशॉट भेज दिया। यह स्क्रीनशॉट पूरी तरह से असली जैसा दिख रहा था, जिसने पीड़िता को बड़े भ्रम में डाल दिया।
इस फर्जी तस्वीर को देखने के बाद पीड़िता कुछ समझ पाती, उससे पहले ही उनके बैंक खाते में बड़ी सेंध लग चुकी थी। जालसाज ने बड़ी चालाकी से महिला के खाते का एक्सेस हासिल कर लिया और उनकी कमाई पर डाका डाल दिया।
चंद मिनटों में खाते से उड़ गए 59 हजार रुपये
ठग ने एक बार नहीं बल्कि दो बार में महिला अधिकारी के खाते से पैसे निकाले, जिसका मैसेज देखकर उनके होश उड़ गए। पहली बार में 24,990 रुपये और दूसरी बार में 34,990 रुपये की रकम उनके बैंक खाते से ऑनलाइन काट ली गई।
इस तरह महज कुछ ही मिनटों के भीतर कुल 59,980 रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम देकर कॉलर ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया। जब तक सीएचओ को अपने साथ हुए इस धोखे का अहसास हुआ, तब तक ठग आसानी से फरार हो चुका था।
पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त जांच हुई शुरू
घटना के तुरंत बाद बदहवास हालत में सीएचओ टीना पाल ने उन्हेल पुलिस थाने पहुंचकर इस मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने तत्काल प्रभाव से साइबर क्राइम के तहत धोखाधड़ी का यह मामला अपनी जांच में ले लिया है।
थाना प्रभारी ने बताया कि जिस मोबाइल नंबर से कॉल आया था, उसकी कॉल डिटेल और लोकेशन को तकनीकी टीम ट्रेस कर रही है। बैंक खाते में ट्रांसफर हुई ठगी की रकम की जानकारी भी संबंधित बैंक प्रबंधन से तुरंत मांगी गई है ताकि पैसा फ्रीज हो सके।

