पेटलावद, अग्निपथ। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे पशु संवर्धन और नस्ल सुधार अभियानों को स्थानीय स्तर पर गहरा झटका लग रहा है। झाबुआ जिले के पेटलावद स्थित शासकीय पशु चिकित्सालय में प्रशासनिक अव्यवस्था और परिवारवाद के गंभीर आरोप सामने आए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्राथमिकताओं में शामिल पशुपालक कल्याण और दुग्ध उत्पादन वृद्धि की योजनाएं इस केंद्र पर केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं। स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों की मनमानी और गैर-जिम्मेदारी के कारण अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह ठप हो चुकी हैं।
कागजों पर दर्ज हो रही उपस्थिति
स्थानीय किसानों और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, पशु चिकित्सालय के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. निनामा की पत्नी भी इसी अस्पताल में सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। आरोप है कि वे केवल अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए केंद्र पर पहुंचती हैं और इसके तुरंत बाद वापस लौट जाती हैं। धरातल पर उनकी उपस्थिति न के बराबर रहने से अस्पताल का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
सरकारी अभियानों से बनाई दूरी
राज्य शासन द्वारा पशुओं की नस्ल सुधार और दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष कृत्रिम गर्भाधान और मुफ्त टीकाकरण अभियान चलाए जा रहे हैं। हालांकि, पेटलावद केंद्र पर पदस्थ डॉक्टर दंपत्ति द्वारा इन महत्वपूर्ण अभियानों से लगातार दूरी बनाए रखने की बात सामने आ रही है। किसान सुबह से अपने बीमार अथवा गर्भाधान योग्य पशुओं को लेकर चिकित्सालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। आपातकालीन स्थितियों में भी डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण कई बार मूक पशुओं की जान जोखिम में पड़ जाती है।
कैबिनेट मंत्री के क्षेत्र में बदहाली
उल्लेखनीय है कि पेटलावद विधानसभा क्षेत्र मध्य प्रदेश शासन की कैबिनेट मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया का गृह क्षेत्र है। एक ओर मंत्री क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हीं के क्षेत्र में जिम्मेदार अधिकारी शासकीय योजनाओं का लाभ आम पशुपालकों तक पहुंचाने के बजाय व्यवस्था को व्यक्तिगत सहूलियत के हिसाब से संचालित कर रहे हैं। शासन द्वारा स्वीकृत निःशुल्क दवा वितरण, टीकाकरण और अनुदान योजनाएं जमीनी स्तर पर निष्प्रभावी साबित हो रही हैं।
उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
अस्पताल की इस बदहाली और अधिकारियों की अनुपस्थिति से आक्रोशित क्षेत्र के जागरूक किसानों और पशुपालकों ने शासन से कड़े कदम उठाने की गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने झाबुआ के जिला कलेक्टर एवं पशु चिकित्सा विभाग के उप संचालक से मांग की है कि पदस्थ दंपत्ति की बायोमेट्रिक उपस्थिति, उपस्थिति पंजिका और योजनाओं के क्रियान्वयन का रिकॉर्ड जब्त कर निष्पक्ष जांच कराई जाए। पशुपालकों का कहना है कि दोषियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए ताकि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप किसानों और पशुपालकों को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।
