धार, अग्निपथ। धार जिले के महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया जारी रहने के बावजूद कई पाठ्यक्रमों की पूरी सीटें अभी तक नहीं भर सकी हैं। जिले में विद्यार्थियों के बीच आज भी परंपरागत स्नातक पाठ्यक्रमों का दबदबा बना हुआ है। बीए, बीकॉम और बीएससी जैसे पारंपरिक पाठ्यक्रमों में विद्यार्थी अधिक रुचि दिखा रहे हैं, जबकि कौशल आधारित और नए रोजगारपरक विषयों में अपेक्षित संख्या में प्रवेश नहीं हो पा रहे हैं।
जिले के मुख्य लीड कॉलेज में बीए, बीएससी और बीकॉम की कुल 3210 सीटों में से 2457 सीटों पर प्रवेश हो चुके हैं। वहीं स्नातकोत्तर स्तर पर एमए और एमकॉम की 1350 सीटों में से 986 सीटें ही भर सकी हैं। ग्रामीण एवं छोटे कस्बों से आने वाले अधिकांश विद्यार्थी जानकारी के अभाव में पुराने विषयों को ही सुरक्षित विकल्प मानकर चुन रहे हैं।
कॉलेजों में रोजगार से जुड़े नए विषय शुरू तो किए गए हैं, लेकिन करियर को लेकर स्पष्ट मार्गदर्शन न होने के कारण छात्र इनमें जोखिम लेने से बच रहे हैं। बीए में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, बीकॉम में बैंकिंग-अकाउंटिंग और बीएससी में विज्ञान वर्ग के प्रति रुझान कायम है। दूसरी ओर, आज का युवा आधुनिक तकनीकी विषयों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, डिजिटल मार्केटिंग और फॉरेंसिक साइंस की ओर आकर्षित हो रहा है।
धार के सरकारी कॉलेजों में इन आधुनिक पाठ्यक्रमों की कमी के कारण 12वीं के बाद कई मेधावी छात्र उच्च शिक्षा के लिए अन्य शहरों का रुख कर रहे हैं। शिक्षाविदों का मानना है कि केवल नए कोर्स शुरू करना काफी नहीं है, बल्कि नियमित करियर काउंसलिंग के माध्यम से विद्यार्थियों को इनके फायदों से जोड़ना भी अत्यंत आवश्यक है।

