उज्जैन, अग्निपथ। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में अब मिठाइयों को चमकाने के लिए चांदी के वर्क का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। कलेक्टर रोशन सिंह ने प्रशासनिक संकुल में आयोजित एक अहम बैठक के दौरान मिठाईयों पर चांदी की परत लगाने पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले इस चलन को बंद करने की शुरुआत उज्जैन से की जा रही है। उन्होंने खाद्य सुरक्षा विभाग और कैटरिंग कारोबारियों को इस फैसले का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है।
लीवर और किडनी के लिए बेहद खतरनाक
बैठक में कलेक्टर रोशन सिंह ने बताया कि बाजार में बिकने वाले सस्ते चांदी के वर्क में अक्सर एल्युमिनियम, लेड और कैडमियम जैसी जहरीली धातुओं की मिलावट होती है। यह मिलावट मानव शरीर के अंगों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाती है।
चांदी या अन्य मिलावटी धातुओं के ये बारीक कण शरीर में कभी पच नहीं पाते हैं। यह जहरीले तत्व सीधे लीवर और किडनी में जमा होकर उन्हें डैमेज कर देते हैं, जिससे व्यक्ति गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाता है।
पाचन तंत्र और नर्वस सिस्टम पर सीधा हमला
नकली और घटिया वर्क के सेवन से पेट में इंफेक्शन, दर्द और अल्सर जैसी गंभीर पाचन समस्याएं पैदा होती हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार भारी धातुओं की यह मिलावट लंबे समय में सीधे इंसान के नर्वस सिस्टम को भी प्रभावित करती है।
इस घातक मिलावट के कारण लोगों की याददाश्त कमजोर होने लगती है और मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। इसी वजह से प्रशासन ने त्योहारों का इंतजार किए बिना मिलावटखोरों पर लगातार सैंपलिंग की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
उज्जैन से हुई प्रदेशभर में अनूठी पहल
कलेक्टर ने खाद्य विभाग के अधिकारियों को ताकीद की है कि वे लगातार बाजारों का निरीक्षण करें ताकि अमानक खाद्य सामग्री की बिक्री पर रोक लग सके। शहर के मिठाई विक्रेताओं और कैटरिंग संचालकों को भी गुणवत्ता के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी बसंतदत्त शर्मा ने बैठक में बताया कि विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। विभाग ने पिछले वित्तीय वर्ष में 420 के लक्ष्य के मुकाबले रिकॉर्ड 513 नमूने लिए हैं, वहीं चालू सत्र में भी अब तक 90 से अधिक सैंपल लिए जा चुके हैं।

