उज्जैन, अग्निपथ। सिंहस्थ-2028 के दौरान उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के स्वागत के लिए शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर भव्य द्वारों का निर्माण किया जाएगा। उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा 38.37 करोड़ रुपये की लागत से नौ प्रवेश द्वारों का निर्माण किया जाएगा। इन द्वारों को इस तरह आकार दिया जाएगा कि शहर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को उज्जैन की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के साथ कुंभ नगरी का अनूठा अहसास हो।
तीन चरणों में तैयार होंगे नौ द्वार
प्राधिकरण ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तीन चरणों में बांटा है। पहले चरण में त्रिशूल द्वार, विक्रमादित्य द्वार और डमरू द्वार प्रस्तावित किए गए हैं। दूसरे चरण में अमृत द्वार, पांचजन्य द्वार और गज द्वार बनाए जाएंगे, जबकि तीसरे चरण में कालगणना द्वार, उज्जयिनी द्वार और सिंहस्थ द्वार का निर्माण किया जाएगा। हालांकि शुरुआत में दो द्वारों के निर्माण से इसकी शुरुआत की जा रही है। परियोजना के सभी नौ द्वारों के लिए कार्यादेश जारी होने के बाद 12 महीने में निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
बंसी पहाड़पुर और जैसलमेर के पत्थरों से होगी नक्काशी
प्रवेश द्वारों को भव्य और कलात्मक स्वरूप देने के लिए बंसी पहाड़पुर तथा जैसलमेर के विशेष पत्थरों का इस्तेमाल किया जाएगा। पीले, गुलाबी और सफेद पत्थरों से बनने वाले इन द्वारों पर बारीक नक्काशी के माध्यम से सनातन परंपरा, सिंहस्थ संस्कृति और उज्जैन के गौरव को पूरी खूबसूरती से उकेरा जाएगा। इनमें खगोल विज्ञान और कालगणना से जुड़े प्रतीकों को भी प्रमुखता से स्थान दिया जाएगा। इससे ये द्वार केवल शहर के सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उज्जैन की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम भी बनेंगे।
निर्माण की रूपरेखा और अधिकारियों के निर्देश
प्राधिकरण के अध्यक्ष ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को उज्जैन की विशिष्ट पहचान से परिचित कराने के उद्देश्य से इन द्वारों का निर्माण कराया जा रहा है। इनका स्वरूप सनातन परंपरा और राजकीय गौरव को प्रदर्शित करेगा। निर्माण एजेंसियों को द्वार बनाने के साथ ही आगामी पांच साल तक उनके रखरखाव की जिम्मेदारी भी सौंपी जाएगी ताकि इनकी सुंदरता बरकरार रहे।
तय समय-सीमा में निर्माण पूरा करना बड़ी चुनौती
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए अब समय बहुत सीमित रह गया है। ऐसे में नौ प्रवेश द्वारों का विशाल निर्माण कार्य निर्धारित समयावधि में पूरा करना प्राधिकरण के सामने एक बड़ी चुनौती साबित होगा। परियोजना की समय-सीमा कार्यादेश जारी होने के बाद 12 महीने तय की गई है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि निर्माण एजेंसियां तय समय-सीमा के भीतर इस जिम्मेदारी को पूरी मुस्तैदी के साथ पूरा कर पाती हैं या नहीं। सिंहस्थ में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए ये प्रवेश द्वार उज्जैन की भव्य पहचान का मुख्य केंद्र बनेंगे।

