कल सेहरा दर्शन और दिन में भस्मारती
1 मार्च को पंच मुखारविंद दर्शन के बाद होगा महाशिवरात्रि पर्व का समापन
उज्जैन, अग्निपथ। विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार (26 फरवरी) को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जायेगा। महाकाल के आंगन में शिव नवरात्रि का यह उत्सव फाल्गुन कृष्ण पंचमी 17 फरवरी से प्रारम्भ हो गया है। जोकि महाशिवरात्रि महापर्व के अगले दिन तक चलेगा। इस दौरान भगवान महाकाल के पट दर्शन हेतु लगभग 44 घंटे खुले रहेंगे।
महाशिवरात्रि महापर्व पर भस्मार्ती हेतु भगवान महाकाल के मंगल पट प्रात: 2.30 बजे खुलेंगे। भस्मारती उपरांत 7.30 से 8.15 दद्योदक आरती, 10.30 से 11.15 तक भोग आरती के पश्चात दोपहर 12 बजे से उज्जैन तहसील की ओर से पूजन-अभिषेक संपन्न होगा। सायं 4 बजे होल्कर व सिंधिया स्टेट की ओर से पूजन व पंचामृत पूजन के बाद भगवान महाकाल को नित्य संध्या आरती के समान गर्म मीठे दूध का भोग लगाया जायेगा। रात्रि में सायं 7 बजे से 10 बजे तक कोटितीर्थ कुण्ड के तट पर विराजित कोटेश्वर महादेव का पूजन, सप्तधान्य अर्पण, पुष्प मुकुट श्रृंगार (सेहरा) के उपरान्त आरती की जायेगी।
11 ब्राह्मणों द्वारा अभिषेक पूजन
27 फरवरी तक प्रतिदिन एकादश-एकादशनी रूद्रपाठ व विभिन्न मंत्रों के माध्यम से 11 ब्राह्मणों द्वारा देवादिदेव भगवान महाकाल का अभिषेक किया जायेगा। उसके पश्यात भस्म लेपन, विभिन्न प्रकार के पाच फलो के रसो से अभिषेक, पंचामृत पूजन (101 लीटर दूध, 31 किलो दही, 21 किलो खांडसारी , 21 किलो शहद, 15 किलो घी), गंगाजल, गुलाब जल, भाँग आदि के साथ केसर मिश्रित दूध से अभिषेक किया जायेगा।
27 फरवरी को होंगे सेहरा दर्शन, दिन में भस्मारती
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी 27 फरवरी को अभिषेक उपरांत भगवान को नवीन वस्त्र धारण कराये जाकर सप्तधान्य का मुखारविंद धारण कराया जायेगा। जिसके उपरांत भगवान महाकालेश्वर को सप्तधान्य अर्पित किया जाएगा जिसमे चावल, खड़ा मूग, तिल, गेंहू, जौ, साल, खड़ा उड़द सम्मिलित रहेंगे। श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारियों द्वारा भगवान महाकाल का श्रृंगार कर पुष्प मुकुट (सेहरा) बांधा जाएगा।
भगवान महाकाल को चंद्र मुकुट, छत्र, त्रिपुंड व अन्य आभूषणों से श्रृंगारित किया जायेगा। भगवान पर न्यौछावर नेग स्वरुप चांदी का सिक्का व बिल्वपत्र अर्पित की जायेगी। भगवान महाकाल की सेहरा आरती की जायेगी व भगवान को विभिन्न मिष्ठान्न, फल, पंञ्च मेवा आदि का भोग अर्पित किये जायेंगे।
27 फरवरी को प्रात: सेहरा दर्शन के उपरांत वर्ष में एक बार दिन में 12 बजे होने वाली भस्मार्ती होगी। भस्मार्ती के बाद भोग आरती होगी व शिवनवरात्रि का पारणा किया जायेगा। 27 फरवरी को सायं पूजन, सायं आरती व शयन आरती के बाद भगवान श्री महाकालेश्वर जी के पट मंगल होगे। 1 मार्च को वर्ष में एक बार एक साथ होने वाले पंचमुखारविन्द (पाँच स्वरूप एक साथ) के दर्शन के साथ महाशिवरात्रि पर्व का समापन होगा।