धार, अग्निपथ। धार प्रधान डाकघर में लाखों रुपयों के वित्तीय गबन के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी और तत्कालीन पोस्ट मास्टर कुणाल मकवाना को होशंगाबाद (नर्मदापुरम) से राउंडअप कर गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। मामले में शामिल दो अन्य आरोपी फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। पुलिस जांच में आशंका जताई जा रही है कि गबन की राशि ३५ लाख रुपये से भी अधिक हो सकती है।
शासकीय राशि का निजी स्वार्थ में दुरुपयोग
प्रारंभिक एवं संभागीय जांच में यह खुलासा हुआ है कि निलंबित डिप्टी पोस्ट मास्टर निर्मलसिंह पंवार, पोस्ट मास्टर कुणाल मकवाना और सहायक डिप्टी डाक नेपालसिंह गुडिय़ा ने मिलीभगत कर लाखों रुपयों की शासकीय राशि का अनाधिकृत रुप से नगद भुगतान कर स्वयं के हित में उपयोग किया। आरोपियों ने लाड़ली लक्ष्मी योजना और फिक्स्ड डिपॉजिट (स्नष्ठ) सहित विभिन्न योजनाओं के खातों से रकम निकालकर हेराफेरी की। जांच के दौरान ११ दिसंबर को चार कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया था, जिसके बाद ६ जनवरी के पहले से ही आरोपी फरार चल रहे थे।
खाताधारकों में व्याप्त चिंता
घोटाले की खबर के बाद से खाताधारक अपनी जमा पूंजी को लेकर डरे हुए हैं। धार के मुख्य डाकघर में करीब ३५ लाख रुपये के वित्तीय घोटाले की पुष्टि हो चुकी है। जांच में सामने आया कि एसबीआई धार से ८ लाख, यूको बैंक से ५ लाख और राज्य सहकारी बैंक इंदौर से १० लाख, कुल २३ लाख रुपये का अनाधिकृत रूप से अन्य खातों में समायोजन कर गबन किया गया। खाताधारकों का कहना है कि बड़े अधिकारी भी उनकी राशि वापस मिलने के समय को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे हैं।
खेल कोटे से मिली थी नौकरी
सूत्रों के अनुसार, मुख्य आरोपी कुणाल मकवाना राष्ट्रीय स्तर का पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी रहा है। उसने १९९६, १९९८ और १९९९ में ऑल इंडिया बैडमिंटन चैंपियनशिप सहित कई खिताब जीते थे। खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के चलते उसे स्पोर्ट्स कोटे से डाक विभाग में पोस्ट मास्टर के पद पर नियुक्ति मिली थी, लेकिन अब उसी पद के दुरुपयोग का गंभीर आरोप उन पर लगा है।
बिना प्रमाण पत्रों के भुगतान और एफडी में धोखाधड़ी
जांच में यह भी पाया गया कि वर्ष २०२५ की विभिन्न तिथियों में बिना किसी मूल प्रमाण पत्र या वैध दस्तावेज के २,५१,८८३ रुपये का नगद भुगतान कर लिया गया। एकीकृत बाल विकास सेवा (ढ्ढष्टष्ठस्) की मुहर लगे प्रमाण पत्रों का, जिनका भुगतान पूर्व में हो चुका था, दोबारा भुगतान उठाकर ३,५७,०२१ रुपये का गबन किया गया। इसके अलावा, एक खाताधारक गोकुलसिंह नर्गेश द्वारा एफडी के लिए दिए गए ६ लाख रुपये के चेक को भी अनाधिकृत रूप से निकाल लिया गया और आज तक उनका खाता नहीं खोला गया। कई अन्य खाताधारकों को भी एफडी की पासबुक आज तक प्राप्त नहीं हुई है।
