शाजापुर, अग्निपथ। कर्मचारियों और श्रमिकों के हितों की अनदेखी के खिलाफ शाजापुर में आक्रोश का सैलाब उमड़ पड़ा। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आंगनवाड़ी सहायिका संघ और विभिन्न श्रमिक संगठनों के बैनर तले सैकड़ों संविदा, ठेका और नियमित कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के लिए आवाज बुलंद की। शहर के प्रमुख मार्गों से नारेबाजी करते हुए एक विशाल रैली निकाली गई, जो कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची। यहां प्रधानमंत्री और केंद्रीय श्रम मंत्री के नाम तहसीलदार को विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया।
प्रमुख मांगें और श्रमिक सुधारों पर जोर
ज्ञापन के माध्यम से संगठनों ने मांग की है कि सभी क्षेत्रों में श्रम कानूनों को बिना किसी छूट के तत्काल लागू किया जाए। श्रमिकों ने इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020 और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी कोड के विवादित बिंदुओं के समाधान की मांग उठाई है। प्रमुख मांगों में ईपीएस-95 के तहत न्यूनतम पेंशन को 1000 रुपये से बढ़ाकर 7500 रुपये करने और इसे महंगाई भत्ते से जोड़ने की बात कही गई है। साथ ही, ईपीएफ के लिए वेतन सीमा 15,000 से बढ़ाकर 30,000 रुपये और ईएसआईसी कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा 42,000 रुपये करने का आग्रह किया गया है।
स्थायीकरण और रोजगार की सुरक्षा का मुद्दा
प्रदर्शनकारियों ने संविधान की मूल भावना का सम्मान करते हुए वर्षों से कार्यरत स्कीम वर्कर्स, ठेका श्रमिकों और संविदा कर्मियों को नियमित (स्थायी) करने की मांग की। ज्ञापन में सरकारी भर्तियों पर लगी रोक हटाने और युवाओं को गारंटीड रोजगार देने की आवश्यकता पर बल दिया गया। इसके अलावा बोनस भुगतान अधिनियम 1965 के तहत गणना सीमा में वृद्धि और इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस को अविलंब बुलाने की मांग भी की गई।
संगठनों की रही प्रभावी भागीदारी
इस प्रदर्शन में भारतीय मजदूर संघ के जिला मंत्री राजेंद्र वर्मा (राहुल), पश्चिम क्षेत्र विद्युत कर्मचारी महासंघ के अशोक राठौर, जगदीश मीणा, और पावर इंजीनियर एसोसिएशन के राकेश सिंह साहू ने सक्रिय भूमिका निभाई। मातृशक्ति की ओर से आंगनवाड़ी जिला महामंत्री कामिनी सिंह ठाकुर और रेखा मालवीय ने मोर्चा संभाला। आयोजन में राज्य कर्मचारी संघ, आउटसोर्स संगठन, कृषि मंडी व तुलावटी संघ सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
