147 करोड़ की लागत के टेंडर अगले महीने खुलेंगे, 12 महीने में होगा तैयार
उज्जैन, अग्निपथ। महाकाल की नगरी विकास की अविरल धारा ने अब उज्जैन के आकाश को छूने की तैयारी कर ली है। बाबा महाकाल के भक्तों और मालवा अंचल के निवासियों के लिए वह घड़ी निकट आ गई है, जब वे सीधे अपनी नगरी में हवाई जहाज से उतर सकेंगे। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण उज्जैन की हवाई पट्टी को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के एयरपोर्ट में बदलने के लिए 147 करोड़ रुपये खर्च कर अगले 12 महीनों में उज्जैन हवाई पट्टी का कायाकल्प एक नए और आधुनिक विमानतल के रूप में करने जा रहा है।
हवाई पट्टी को एयरपोर्ट में बदलने की तैयारी में टेंडर प्रक्रिया अंतिम दौर में है। इस महत्वपूर्ण परियोजना में 30 अप्रैल को निविदा खुलने के बाद निर्माण एजेंसी का तय हो जाएगी। प्रशासन ने सिंहस्थ 2028 की संवेदनशीलता और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए इस काम पूरा करने की समय-सीमा 12 महीने तय की है। सिंहस्थ से पहले रनवे, टैक्सीवे और आधुनिक नेविगेशन लाइटों का कार्य पूर्ण कर नियमित उड़ानें शुरू की जा सकें।
सिंहस्थ 2028 का भव्य द्वार बनेगा उज्जैन एयरपोर्ट
वर्ष 2028 में होने वाला सिंहस्थ महापर्व केवल उज्जैन के लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए आस्था का केंद्र होगा। करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए इस एयरपोर्ट का विकास किसी वरदान से कम नहीं है। अब तक देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को इंदौर उतरकर सडक़ मार्ग की लंबी यात्रा करनी पड़ती थी, लेकिन सिंहस्थ 2028 के दौरान वीआईपी मूवमेंट और आम यात्रियों के लिए यह एयरपोर्ट एक प्रवेश द्वार की भूमिका निभाएगा। हवाई संपर्क जुडऩे से श्री महाकाल लोक की आभा अब वैश्विक पटल पर और भी सुलभ हो जाएगी, जिससे पर्यटन और स्थानीय रोजगार के नए आयाम स्थापित होंगे।
बुनियादी ढांचे का होगा पूर्ण कायाकल्प
यह केवल साधारण मरम्मत का कार्य नहीं है, बल्कि उज्जैन एयरपोर्ट के परिचालन क्षेत्र का पुनर्जन्म है। इस योजना के तहत वर्तमान बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव किए जा रहे हैं:
- नया रनवे और लिंक टैक्सीवे: पुराने और कमजोर रनवे को पूरी तरह हटाकर एक नया और पहले से दोगुना लंबाई वाला रनवे तैयार किया जाएगा, जिस पर व्यावसायिक विमान आसानी से लैंड कर सकेंगे।
- विशाल एप्रन और पार्किंग: विमानों को सुरक्षित खड़ा करने के लिए एक बड़ा एप्रन बनाया जा रहा है, जिससे एक साथ कई विमानों का संचालन संभव होगा।
- आइसोलेशन बे: आपातकालीन स्थितियों या तकनीकी खराबी के दौरान विमानों को सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष आइसोलेशन बे का निर्माण किया जाएगा।
- अत्याधुनिक ड्रेनेज सिस्टम: मानसून के दौरान जलभराव की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए वैज्ञानिक तरीके से जल निकासी की व्यवस्था की जाएगी।
- सुरक्षा की अभेद्य दीवार: एयरपोर्ट की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए एक नई और मजबूत परिधि सीमा दीवार (बाउंड्री वॉल) का निर्माण किया जाएगा।
रात में सुरक्षित लैंडिंग
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इस प्रोजेक्ट में अत्याधुनिक विद्युत और नेविगेशन व्यवस्था को शामिल किया गया है। रनवे और टैक्सीवे के किनारों पर हाई-टेक नेविगेशन लाइटें लगाई जाएंगी, जिससे रात के अंधेरे या घने कोहरे में भी विमानों का आवागमन बाधित नहीं होगा। इसके साथ ही सुरक्षाबलों की गश्त के लिए पूरी परिधि में एक विशेष मार्ग बनाया जाएगा, ताकि पल-पल की निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
विकास की नई उड़ान और आर्थिक उन्नति
हवाई पट्टी के विस्तार से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि यह देवास, शाजापुर, रतलाम और आगर मालवा जैसे पड़ोसी जिलों के लिए भी प्रगति का इंजन बनेगा। हवाई कनेक्टिविटी से होटल व्यवसाय, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार को वैश्विक बाजार मिलेगा। यह एयरपोर्ट उज्जैन को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण बिजनेस हब के रूप में भी स्थापित करेगा। सिंहस्थ 2028 की तैयारी में यह कदम मील का पत्थर साबित होने वाला है।
किसानों को 500 करोड़ मुआवजा
सूत्रों के मुताबिक उज्जैन हवाई पट्टी के एयरपोर्ट में उन्नयन के लिए आसपास की सैकड़ों एकड़ जमीन अधिगृहित की गई है। जिसके लिए किसानों को प्रदेश शासन ने 500 करोड़ रुपए से अधिक का मुआवजा दिया गया है।
निविदा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां और समय-सीमा
इस महापरियोजना को समय पर पूरा करने के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने बेहद सख्त और स्पष्ट समय-सारणी निर्धारित की है। निर्माण जगत की बड़ी कंपनियों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है:
| विवरण | महत्वपूर्ण तिथि / राशि |
| निविदा जमा करने की अंतिम तिथि | 1 अप्रैल 2026 |
| तकनीकी निविदा खोलने की तिथि | 30 अप्रैल 2026 |
| परियोजना की कुल अनुमानित लागत | 147 करोड़ 36 लाख रुपये |
| जमानत राशि (ईएमडी) | 4 करोड़ 42 लाख 8 हजार रुपये |
| काम पूरा करने की समय-सीमा | 12 महीने (मानसून सहित) |
