धार में बच्चों और महिलाओं के निवाले पर डाका: दो गोडाउन से भारी मात्रा में टेक होम राशन जप्त

धार, अग्निपथ। धार जिले में मासूम बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण आहार पर डाका डालने वाले एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। जिले में शासकीय योजनाओं के राशन की हेराफेरी करने वाले माफियाओं के विरुद्ध कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के कड़े निर्देशन में शनिवार 28 मार्च 2026 को बड़ी कार्यवाही को अंजाम दिया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने नौगांव और तिरला थाना क्षेत्रों में दबिश देकर अवैध रूप से भंडारित भारी मात्रा में टेक होम राशन बरामद किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सरकारी राशन आंगनवाड़ियों के बजाय निजी डेयरी फार्म हाउस के गोडाउन में छिपाकर रखा गया था।

दो अलग-अलग स्थानों पर दबिश, गोडाउन सील

पुलिस से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर जिला कार्यक्रम अधिकारी ने तत्काल दो विशेष टीमों का गठन किया। पहली कार्यवाही ग्राम आमखेड़ा में की गई, जहाँ कैलाश पिता नंदराम टामकिया के डेयरी फार्म हाउस स्थित गोडाउन पर टीम ने अचानक छापा मारा। यहाँ तलाशी के दौरान 44 बोरी अवैध पोषण आहार पाया गया। टीम ने मौके पर ही पंचनामा बनाकर गोडाउन को पूरी तरह सील कर दिया है। इसी कड़ी में दूसरी बड़ी कार्यवाही ग्राम ज्ञानपुरा में धीरज शर्मा के डेयरी फार्म हाउस पर की गई। यहाँ से प्रशासन ने 24 बैग और 29 पैकेट अवैध पोषण आहार जप्त किया है, जिसे तत्काल तिरला पुलिस की सुपुर्दगी में दे दिया गया है।

देलमी संयंत्र से जुड़े हैं तार, मिलीभगत की बड़ी आशंका

इस पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज पहलू यह है कि यह पोषण आहार धार जिले के देलमी स्थित आजीविका मिशन के सरकारी संयंत्र में तैयार होता है। नियमानुसार इस उच्च गुणवत्ता वाले आहार को इंदौर संभाग के 6 जिलों की आंगनवाड़ियों में बच्चों और महिलाओं के लिए वितरित किया जाना था। अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि सरकारी सुरक्षा और निगरानी के बीच संयंत्र से निकला यह राशन आंगनवाड़ी केंद्रों के बजाय निजी डेयरी फार्मों तक कैसे पहुँच गया? क्या इस काले कारोबार में विभाग के ही कुछ सफेदपोश जिम्मेदार और संयंत्र के अधिकारी शामिल हैं? यह जांच का एक गंभीर विषय बन गया है।

पुरानी घटनाओं और सुनियोजित सिंडिकेट ने खोली पोल

यह कोई पहला मामला नहीं है जब इस क्षेत्र में राशन की चोरी पकड़ी गई हो। विगत दिनों भी इसी क्षेत्र में राशन से लबालब भरा एक ट्राला एक निजी गोडाउन पर खड़ा मिला था। उस समय आजीविका मिशन के कर्मचारियों ने बड़ी चतुराई से इसे ड्राइवर की गलती बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया था और आनन-फानन में ट्रक वापस संयंत्र ले गए थे। लेकिन शनिवार की इस बड़ी कार्यवाही ने यह साफ कर दिया है कि यह महज कोई मानवीय गलती नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित सिंडिकेट है। यह गिरोह गरीब बच्चों और गर्भवती महिलाओं के हक का कीमती पोषण आहार बाजार में ऊँचे दामों पर खपा रहा है।

जांच के घेरे में आए जिम्मेदार अधिकारी

प्रशासन की इस कार्यवाही के बाद अब आजीविका मिशन और महिला एवं बाल विकास विभाग के उन अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है, जिनकी नाक के नीचे इतना बड़ा भ्रष्टाचार का खेल चल रहा था। कलेक्टर के सख्त रुख को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं और दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें जब्त किए गए राशन के बैच नंबर और परिवहन रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं ताकि इस रैकेट की अंतिम कड़ी तक पहुँचा जा सके।

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