धार, अग्निपथ। धार की ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला में शनिवार का दिन हलचल भरा रहा। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के माननीय न्यायाधीश विजय कुमार शुक्ला अचानक भोजशाला परिसर पहुंचे। दोपहर 1 बजकर 52 मिनट पर शुरू हुआ यह दौरा करीब 53 मिनट तक चला। आगामी 2 अप्रैल को होने वाली महत्वपूर्ण सुनवाई से ठीक पहले न्यायाधीश का यह जमीनी मुआयना कानूनी गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और प्रशासनिक मौजूदगी
न्यायाधीश के आगमन को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। उनके साथ धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी भी मौजूद रहे। सुरक्षा के कड़े घेरे के बीच न्यायाधीश ने परिसर के भीतर प्रवेश किया और एक-एक बिंदु पर ध्यान केंद्रित किया। इस दौरान आम लोगों की आवाजाही पर विशेष नजर रखी गई ताकि निरीक्षण की प्रक्रिया निर्बाध रूप से संपन्न हो सके।
हर स्तंभ और शिलालेख का सूक्ष्म मुआयना
निरीक्षण के दौरान न्यायमूर्ति ने भोजशाला के विभिन्न हिस्सों, प्राचीन स्तंभों और शिलालेखों को बेहद बारीकी से देखा। उन्होंने वहां की वास्तुकला और ऐतिहासिक संरचनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी लीं। प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा हाल ही में किए गए कार्यों और वर्तमान में वहां की जा रही व्यवस्थाओं के बारे में विस्तार से अवगत कराया। 53 मिनट के इस दौरे में उन्होंने परिसर के हर उस कोने को देखा जो अदालती कार्यवाही और सर्वे रिपोर्ट के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
2 अप्रैल की सुनवाई से पहले बढ़ा उत्साह
गौरतलब है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने करीब 98 दिनों तक चले वैज्ञानिक सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट पहले ही अदालत में पेश कर दी है। इस रिपोर्ट की प्रतियां सभी संबंधित पक्षकारों को सौंपी जा चुकी हैं। 16 मार्च को इंदौर हाईकोर्ट में हुई पिछली सुनवाई के दौरान पक्षकारों से दावे और आपत्तियां मांगी गई थीं। उसी समय न्यायाधीश ने व्यक्तिगत रूप से स्थल का निरीक्षण करने की इच्छा जताई थी।
रिपोर्ट और आपत्तियों पर टिकी सबकी निगाहें
भोजशाला को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद और वैज्ञानिक साक्ष्यों के बीच अब 2 अप्रैल की तारीख बेहद निर्णायक मानी जा रही है। न्यायाधीश द्वारा खुद जमीनी हकीकत देखने के बाद अब सभी की नजरें अदालत की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस दौरे के बाद मामले को नई दिशा मिल सकती है और एएसआई की रिपोर्ट पर आने वाली आपत्तियों पर न्यायालय का रुख स्पष्ट होगा।
