डीएफओ की सख्ती के बावजूद बीट से गायब रहते हैं कर्मचारी
धार। धार जिले के मांडू और धामनोद वन परिक्षेत्र में पिछले 10 दिनों से भीषण आग धधक रही है। एक ओर वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) जंगल की सुरक्षा के लिए टोल फ्री नंबर और जन-संवाद जैसे नवाचार कर रहे हैं, वहीं मैदानी कर्मचारियों की लापरवाही इन कोशिशों पर भारी पड़ रही है। नीलकंठ महादेव मंदिर के पास खाई से शुरू हुई यह आग अब सोनगढ़ किले और तारापुर घाट तक फैल गई है, जिससे 1.25 लाख हेक्टेयर में फैले वन क्षेत्र और वहां मौजूद तेंदुओं सहित अन्य वन्यजीवों की जान पर संकट बन आया है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, गर्मी की दस्तक के साथ ही पतझड़ के कारण जंगल सूखे पत्तों से भरे हैं। मांडू-धरमपुरी मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों ने रात के समय पहाड़ों से उठती ऊंची लपटों की पुष्टि की है। आरोप है कि आग लगने की सूचना के बावजूद स्थानीय बीट कर्मचारी मौके से नदारद रहते हैं। निगरानी तंत्र की इसी कमजोरी का फायदा उठाकर कई बार उपद्रवी तत्वों द्वारा जानबूझकर भी आग लगाई जाती है ताकि भविष्य में वन भूमि पर अतिक्रमण किया जा सके।
जिले के विशाल भौगोलिक क्षेत्र को देखते हुए वन विभाग के पास संसाधनों की भारी कमी है। आग पर तत्काल काबू पाने के लिए न तो पर्याप्त पानी के स्रोत हैं और न ही आधुनिक उपकरण। वर्तमान में विभाग केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर है। रिहायशी इलाकों के करीब आग पहुंचने से अब जंगली जानवरों के आबादी वाले क्षेत्रों में घुसने का डर बढ़ गया है, जिससे मानव-वन्यजीव द्वंद्व की स्थिति बन सकती है।
शासन द्वारा वनों के संरक्षण के लिए हर साल करोड़ों रुपये का बजट आवंटित किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होने से अवैध कटाई और आगजनी की घटनाएं थम नहीं रही हैं। मांडू, उमरबन और गंधवानी से सटे इन जंगलों में यदि समय रहते नियंत्रण नहीं पाया गया, तो पर्यटन और पर्यावरण की दृष्टि से अपूरणीय क्षति होने की आशंका है।
चुनौतियां और हकीकत
आग की निगरानी के लिए कोई प्रभावी ‘रीयल-टाइम’ सिस्टम नहीं।
सूचना तंत्र बेहद कमजोर, ग्रामीणों और विभाग के बीच समन्वय का अभाव।
बीट स्तर के अधिकांश कर्मचारी मुख्यालय से गायब।
निर्देश दिए गए हैं “वन सुरक्षा समिति और मैदानी अमले को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। आगजनी की घटनाओं में शामिल कुछ संदिग्धों पर FIR भी दर्ज कराई गई है। हम संसाधनों की कमी के बावजूद स्थिति पर नियंत्रण पाने का प्रयास कर रहे हैं।” — विजयनांथम टीआर, डीएफओ, धार
