बड़नगर, अग्निपथ। तकनीकी युग में सोशल मीडिया पर फर्जी खाते बनाकर मासूम लोगों को ठगने वाले अपराधी सक्रिय हैं। शासन और प्रशासन की तमाम कड़ाई के बावजूद जालसाज अब बड़े अधिकारियों के नाम का सहारा लेकर धोखाधड़ी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला उज्जैन पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा के नाम से बनाई गई एक फर्जी फेसबुक आईडी का सामने आया है। इस फर्जी खाते के माध्यम से बड़नगर के पत्रकार अजय राठौड़ को निशाना बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन समय रहते उनकी सजगता ने इस षडयंत्र का पर्दाफाश कर दिया।
सस्ते फर्नीचर का झांसा
पत्रकार अजय राठौड़ फेसबुक पर पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा की फोटो लगी एक आईडी से जुड़े हुए थे। मंगलवार 31 मार्च को इसी फर्जी आईडी से उन्हें संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें सामान्य बातचीत के बाद मोबाइल नंबर की मांग की गई। जालसाज ने स्वयं को पुलिस अधीक्षक बताते हुए झांसा दिया कि उनका एक मित्र केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में कार्यरत है और वह अपना फर्नीचर बहुत कम कीमत पर बेचना चाहता है। जब पत्रकार ने संदेह होने पर सामने वाले व्यक्ति से उसका दूरभाष नंबर मांगा, तो जालसाज घबरा गया। उसने तुरंत अपने संदेश हटा दिए और कोई प्रत्युत्तर नहीं दिया।
इस संदिग्ध गतिविधि की जानकारी जब स्वयं पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा को दी गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उक्त फेसबुक खाता पूरी तरह फर्जी है। उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिए कि ऐसी फर्जी आईडी की कड़ी जांच की जाएगी और लिंक प्राप्त होते ही उसे बंद करने की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस तक मामला पहुँचते ही वह फर्जी आईडी सोशल मीडिया की खोज सूची से ओझल हो गई। पुलिस विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात आईडी से आने वाले प्रलोभनों या संदेशों पर विश्वास न करें और तुरंत इसकी सूचना संबंधित थाने में दें।
