मौसम की मार और गिरते दामों ने तोड़ी अन्नदाता की कमर, लागत निकालना भी हुआ दूभर

धार, अग्निपथ। इस साल गेहूं की फसल की बुआई के बाद से ही प्रकृति के बदलते मिजाज ने अन्नदाता की कमर तोड़ दी है। ‘खुद को तपाकर धूप में हलधर ने इसे कुंदन कर डाला’ वाली कहावत आज किसानों के लिए संघर्ष की दास्तां बन गई है। खेतों में सोने की तरह चमकने वाली गेहूं की फसल की कटाई तो पूर्ण हो गई, लेकिन जब उपज सामने आई तो किसानों के चेहरों पर मायूसी छा गई। चार महीने की हाड़तोड़ मेहनत और पसीने से सींची गई फसल मौसम की बेरुखी के कारण उम्मीद के मुताबिक दाने नहीं दे पाई।

उत्पादन में भारी गिरावट, 10 से 11 क्विंटल प्रति बीघा पर सिमटी उपज

इस बार क्षेत्र के किसानों को गेहूं की पैदावार में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। फसल की बुआई के समय से ही मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहा। फरवरी महीने में अचानक बढ़ी गर्मी और फिर बेमौसम की बारिश ने गेहूं की बालियों को काफी क्षति पहुँचाई। स्थिति यह है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार उत्पादन घटकर महज 10 से 11 क्विंटल प्रति बीघा रह गया है। किसान विजय गोस्वामी ने बताया कि गेहूं की खेती में खाद, बीज और सिंचाई मिलाकर प्रति बीघा 15 हजार रुपये से अधिक का खर्च आया है, जबकि कम उत्पादन के कारण अब लागत निकालना भी दूभर हो गया है।

समर्थन मूल्य और बोनस का गणित: ऊंट के मुंह में जीरा

किसानों को उम्मीद थी कि सरकार चुनावी वादों के अनुरूप 2700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी करेगी, लेकिन वर्तमान में समर्थन मूल्य 2275 रुपये तय किया गया है। इसमें 125 रुपये का बोनस जोड़कर सरकारी खरीदी का मूल्य 2400 रुपये रहेगा। किसानों का कहना है कि यह ऊंट के मुंह में जीरा समान है। सरकारी खरीदी की तारीख 1 अप्रैल से बढ़ाकर 10 अप्रैल किए जाने से भी रोष है। नकदी की जरूरत के कारण किसान अपनी उपज को औने-पौने दामों पर मंडियों में बेचने को मजबूर हैं।

मंडियों में शोषण का शिकार हो रहे किसान

धार जिले में इस बार करीब 3 लाख 40 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बुआई हुई थी, जिससे 14 से 15 लाख मैट्रिक टन उत्पादन की उम्मीद है। हालांकि, मंडी में आवक बढ़ते ही भाव गिर गए हैं। मार्च के शुरुआत में जो गेहूं 2700 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था, अब वह 2000 से 2300 रुपये के बीच सिमट गया है। इससे किसानों को प्रति क्विंटल 300 से 500 रुपये का सीधा घाटा हो रहा है। किसानों का आरोप है कि सरकार एमएसपी की बात तो करती है, लेकिन मंडियों में व्यापारी इससे कम दाम पर अनाज खरीदकर किसानों को ठग रहे हैं।

आवक तेज पर दाम बेअसर, दुविधा में धरतीपुत्र

वर्तमान में मंडी में प्रतिदिन 10 से 12 हजार बोरी गेहूं की आवक हो रही है। किसान इस दुविधा में हैं कि वे अपनी उपज अभी बेचें या सरकारी सोसाइटी खुलने का इंतजार करें। यदि वे अभी मंडी में फसल बेचते हैं, तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है और यदि इंतजार करते हैं, तो उन्हें अपनी अगली जरूरतों के लिए रुपयों की किल्लत का सामना करना पड़ेगा। कुल मिलाकर, इस साल मौसम और बाजार दोनों ने ही धरतीपुत्रों को संकट में डाल दिया है।

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