युद्ध की आहट के बीच इंजन ऑयल और ग्रीस की किल्लत, स्टॉक जमाखोरी का अंदेशा

तराना, अग्निपथ। विश्व पटल पर युद्ध के खतरों ने देश और विदेश में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। इस वैश्विक संकट के बीच तराना के ऑटो पार्ट्स विक्रेता संघ के अध्यक्ष विपुल सिंह निगम ने बाजार की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि युद्ध की खबरों के साथ ही भावों में बेवजह उछाल देखा जा रहा है। हालांकि गैस, डीजल और पेट्रोल जैसी वस्तुओं पर शासकीय नियंत्रण होने से इनकी उपलब्धता बनी हुई है, लेकिन पेट्रोलियम पदार्थों से बनने वाली अन्य सामग्री जैसे इंजन ऑयल और ग्रीस अचानक बाजार से गायब हो गए हैं।

प्रतिष्ठित ब्रांडों की कृत्रिम कमी से बढ़ी परेशानी

विपुल सिंह निगम ने आरोप लगाया कि बाजार में सर्वो और कैस्ट्रोल जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड के इंजन ऑयल मुंह मांगे दाम देने पर भी नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने अंदेशा जताया कि बड़े स्टॉकहोल्डर्स ने माल दबाकर रखा है ताकि कृत्रिम अभाव पैदा कर मुनाफाखोरी की जा सके। आश्चर्य की बात यह है कि शासन ने ईंधन का दो महीने का स्टॉक होने का दावा किया था, तो फिर इंडियन ऑयल का उत्पाद ‘सर्वो’ बाजार से कैसे गायब हो गया।

प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल, नकली तेल का बढ़ा खतरा

इस गंभीर स्थिति पर प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। निगम ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही स्टॉकहोल्डर्स के गोदामों पर छापेमारी कर माल जब्त नहीं किया गया, तो बाजार में घटिया और नकली इंजन ऑयल की घुसपैठ बढ़ जाएगी। यह नकली उत्पाद वाहनों के इंजनों को भारी नुकसान पहुँचा सकते हैं, जिससे आम जनता की परेशानी और आर्थिक बोझ और अधिक बढ़ जाएगा।

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