भोजशाला विवाद: मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत; हाईकोर्ट की सुनवाई टालने से इनकार

धार, अग्निपथ। धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में मुस्लिम पक्ष को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किए गए सर्वे से जुड़ी याचिकाओं पर हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यह मामला वर्तमान में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में है, इसलिए मुस्लिम पक्ष को अपनी सभी शिकायतों और साक्ष्यों से जुड़ी मांगों के लिए हाईकोर्ट का ही दरवाजा खटखटाना चाहिए। इस फैसले के बाद अब भोजशाला के भविष्य का निर्णय इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ के तर्कों पर टिका है।

हाईकोर्ट की निष्पक्षता पर सुप्रीम कोर्ट का भरोसा

मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि उन्हें उच्च न्यायालय की कार्यप्रणाली और न्याय प्रक्रिया पर पूर्ण विश्वास है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट सभी पक्षों की आपत्तियों पर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप विचार करेगा और इस स्तर पर शीर्ष अदालत मामले की मेरिट में दखल देना उचित नहीं समझती। मुस्लिम पक्ष को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी दलीलें और साक्ष्य प्राप्त करने की मांग लेकर पुनः उच्च न्यायालय के समक्ष उपस्थित हों।

मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने तर्क दिया था कि उन्हें एएसआई की रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। उन्होंने सर्वे की वीडियोग्राफी और रंगीन छायाचित्र उपलब्ध कराने के साथ ही 2 अप्रैल 2026 से प्रस्तावित हाईकोर्ट की सुनवाई को टालने की मांग भी की थी। हालांकि, सीजेआई ने इन मांगों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि तकनीकी आपत्तियों का निराकरण हाईकोर्ट ही करेगा। दूसरी ओर, हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने पहले ही कैविएट दायर कर दी थी, ताकि एकपक्षीय फैसला न हो सके। अब सभी की निगाहें इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच पर होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

00000

Breaking News