15 करोड़ के साइंस सेेंटर का लोकार्पण, विस्तार के लिए 25 एकड़ जमीन भी और देंगे
उज्जैन, अग्निपथ। मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन अब अपनी प्राचीन वैज्ञानिक पहचान को पुनर्जीवित कर वैश्विक पटल पर छाने को तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान घोषणा की कि उज्जैन केवल आस्था की नगरी नहीं, बल्कि काल गणना की वैज्ञानिक धुरी है। इसलिए आने वाले समय में ग्रीनविच नहीं अब ‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’ से होगी काल गणना। उन्होंने कहा कि समय और अंतरिक्ष का जो संबंध भारतीय ग्रंथों में सदियों पहले लिख दिया गया था, आज दुनिया उसे नए सिरे से समझ रही है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए सरकार ने उज्जैन को साइंस सिटी के रूप में विकसित करने के लिए 15 करोड़ रुपये की लागत से नवनिर्मित साइंस सेंटर का लोकार्पण किया और इसके विस्तार हेतु 25 एकड़ अतिरिक्त भूमि आवंटित करने की निर्णय लिया।
भारतीय पद्धति है अधिक सटीक: मुख्यमंत्री
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय काल गणना सूर्य, चंद्रमा और नक्षत्रों की गति पर आधारित है, जो पूरी तरह दोषरहित है। उन्होंने ग्रीनविच मीन टाइम की तुलना में भारतीय समय मापन पद्धति को अधिक सटीक बताया। डॉ. यादव ने तर्क दिया कि भारतीय पद्धति सूर्योदय और सूर्यास्त के प्राकृतिक चक्र पर टिकी है, जो पृथ्वी के घूर्णन के साथ सटीक तालमेल रखती है। मुख्यमंत्री ने डोंगला स्थित वेधशाला का जिक्र करते हुए बताया कि कर्क रेखा और शून्य देशांतर के कटाव बिंदु पर स्थित होने के कारण यह स्थान वैश्विक काल गणना के लिए सबसे उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी वैज्ञानिक विरासत पर गर्व करना सीख रहा है।
उज्जैन में खत्म हो जाती है अध्यात्म और विज्ञान की दूरी: केंद्रीय मंत्री
सम्मेलन में देश के दिग्गज विचारकों और वैज्ञानिकों ने अपनी बात रखी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उज्जैन वह स्थान है जहाँ अध्यात्म और विज्ञान के बीच की दूरी समाप्त हो जाती है। उन्होंने महाकाल स्टैंडर्ड टाइम की स्थापना का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि जब एआई भी यह स्वीकार कर रहा है कि काल गणना का केंद्र उज्जैन है, तो हमें अपने वैज्ञानिक स्वाभिमान को पुन: स्थापित करना चाहिए।
विरासत को समझें और नवाचार करें युवा
प्रख्यात चिंतक सुरेश सोनी ने काल की अवधारणा पर गहरा प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में समय को केवल एक ईकाई नहीं, बल्कि एक प्रवाह माना गया है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी विरासत को समझें और प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर नवाचार करें। वहीं, नीति आयोग के सदस्य और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वी.के. सारस्वत ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की चर्चा की। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान हमारे प्राचीन ज्ञान और आधुनिक डीप-टेक (जैसे क्वांटम तकनीक और सेमीकंडक्टर) के संगम से ही संभव है।
प्रदर्शनी के आकर्षण: ड्रोन तकनीक से लेकर इसरो के मॉडल तक
सम्मेलन के दौरान आयोजित प्रदर्शनी ने आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान के अद्भुत मेल को जीवंत कर दिया।ॉ प्रदर्शनी में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का स्टॉल युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र रहा। यहाँ सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल, मंगलयान और चंद्रयान के सटीक मॉडल प्रदर्शित किए गए। छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान की बारीकियां समझाने के लिए इसरो के विशेषज्ञों ने नैनो-सैटेलाइट मेकिंग वर्कशॉप भी आयोजित की, जिसमें 120 से अधिक भावी इंजीनियरों ने हिस्सा लिया। अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन किया गया ।
इसमें मेडिकल ड्रोन दिखाए गए जो आपातकालीन स्थिति में जीवन रक्षक दवाएं और अंग पहुँचाने में सक्षम हैं। साथ ही, एयर टैक्सी ड्रोन ने दर्शकों को भविष्य के शहरी यातायात की झलक दिखाई। खेती को सुगम बनाने वाले एग्री ड्रोन का प्रदर्शन भी किया गया, जो कीटनाशकों के छिडक़ाव और निगरानी में बदलाव ला सकते हैं।
भारतीय ज्ञान परंपरा और प्राचीन ग्रंथ: शिक्षा मंत्रालय के इंडियन नॉलेज सिस्टम के स्टॉल पर कौटिल्य के अर्थशास्त्र, भास्कराचार्य के ग्रंथों और प्राचीन खगोल विज्ञान की दुर्लभ पुस्तकों का प्रदर्शन किया गया।
मैसूर के भारती योगाधाम द्वारा प्रदर्शित गोल यंत्र और दक्षिण भारत के पहले जंतर-मंतर के मॉडल ने यह सिद्ध किया कि हमारे पूर्वजों के पास बिना टेलिस्कोप के भी ग्रहों की गणना करने की अद्भुत क्षमता थी।
तारामंडल में विज्ञान केंद्र का लोकार्पण
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तारामंडल परिसर में 15 करोड़ 06 लाख की राशि से नवनिर्मित उज्जैन विज्ञान केंद्र का लोकार्पण भी किया। सीएम ने बताया कि इस केंद्र में गैलरी ऑन साइंस, आउटडोर साइंस पार्क और इनोवेशन लैब जैसी सुविधाएं हैं। यह केंद्र छात्रों में रटने की प्रवृत्ति को खत्म कर प्रयोगों के माध्यम से सीखने की संस्कृति विकसित करेगा। विज्ञान भारती के शिव कुमार शर्मा ने इस अवसर पर विद्यार्थी विज्ञान मंथन 2026-27 का शुभारंभ भी किया, जिसका उद्देश्य स्कूली बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण पैदा करना है।
सिंहस्थ 2028: 725 करोड़ के कार्यों का भूमिपजून
आगामी सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों की झड़ी लगा दी। केंद्रीय मंत्री प्रधान के साथ उन्होंने 701.86 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 19.80 किमी लंबे 4-लेन बाईपास का भूमि पूजन किया। यह मार्ग इंदौर-उज्जैन मार्ग को जोड़ते हुए यातायात के दबाव को कम करेगा। मुख्यमंत्री ने अनुमान जताया कि इस सिंहस्थ में 35 से 40 करोड़ श्रद्धालु आएंगे, जिनके लिए बुनियादी ढांचे का विकास अभी से शुरू कर दिया गया है। साथ ही, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 22.52 करोड़ की लागत से विक्रमादित्य हेरिटेज होटल के विस्तार कार्य का भी शिलान्यास किया गया।
