स्वच्छता का महासंग्राम: उज्जैन की जोड़ीदार बनी उन्हेल नगर परिषद, अब नंबर वन बनने की बारी

उन्हेल/उज्जैन, अग्निपथ। स्वच्छता की दौड़ में अब उन्हेल नगर परिषद एक लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार है। उज्जैन नगर निगम और उन्हेल नगर परिषद के बीच हुए ‘स्वच्छ शहर जोड़ी’ के अनुबंध ने विकास की नई इबारत लिख दी है। शनिवार को नगरीय प्रशासन के दिग्गज अधिकारियों ने जब उन्हेल की सड़कों और बाजारों का रुख किया, तो एक बात साफ हो गई कि अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन राजीव निगम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि टीम वर्क और दृढ़ इच्छाशक्ति से उन्हेल स्वच्छता के मानचित्र पर शीर्ष स्थान अर्जित करेगा। उज्जैन नगर निगम इस सफर में उन्हेल का हाथ थामकर उसे तकनीकी और व्यावहारिक सहयोग प्रदान कर रहा है।

बड़े अफसरों ने संभाली कमान, बाजारों में दी समझाइश

निरीक्षण के दौरान संयुक्त संचालक राजीव निगम, उपसंचालक भविष्य खोबरागडे और उज्जैन नगर निगम उपायुक्त योगेंद्र सिंह पटेल ने नगर परिषद के कर्मचारियों के साथ मिलकर मोर्चा संभाला। अधिकारियों ने न केवल कार्यालय में फाइलें देखीं, बल्कि चिलचिलाती धूप में बाजारों का भ्रमण भी किया। व्यापारियों से सीधा संवाद करते हुए उन्हें अपनी दुकानों के सामने अनिवार्य रूप से दो डस्टबिन (गीला और सूखा कचरा अलग करने हेतु) रखने की हिदायत दी गई। निरीक्षण के दौरान सबसे सख्त रुख नालियों पर किए गए अतिक्रमण को लेकर रहा। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नालियों के ऊपर से अवैध कब्जे तुरंत हटाए जाएं ताकि जल निकासी में कोई बाधा न आए और गंदगी का अंबार न लगे।

थ्री स्टार और ओडीएफ डबल प्लस की सफलता से आगे का सफर

लगभग 15 हजार की आबादी और 15 वार्डों वाली उन्हेल नगर परिषद ने स्वच्छता के क्षेत्र में पहले ही अपनी पहचान बनाई है। स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 में परिषद को 3 स्टार रेटिंग और ‘ओडीएफ डबल प्लस’ का गौरव प्राप्त हो चुका है। यहाँ के नवाचार, जैसे झोला बैंक और बर्तन बैंक की स्थापना, पूरे संभाग में चर्चा का विषय हैं। कचरा प्रबंधन के लिए संचालित ‘मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी’ और ‘फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट’ की व्यवस्थाओं को देखकर संयुक्त संचालक ने संतोष व्यक्त किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि हमें यहाँ रुकना नहीं है, बल्कि अब ‘सेवन स्टार’ और कचरा मुक्त शहर की श्रेणी में आने के लिए काम करना है।

कार्यशाला में मिला ‘नंबर वन’ बनने का गुरुमंत्र

कार्यशाला को संबोधित करते हुए संयुक्त संचालक निगम ने स्वच्छता के पांच प्रमुख सूत्र बताए। उन्होंने कहा कि केवल सफाई करना काफी नहीं है, बल्कि कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण (गीला और सूखा अलग करना) अनिवार्य है। नागरिकों से सीधा संवाद, वार्ड चौपालों का आयोजन, स्कूलों में जागरूकता गतिविधियां और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से स्वच्छता को एक जन-आंदोलन बनाना होगा। उन्होंने 3आर (रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकिल) के सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि पुराने सामान से नई उपयोगी चीजें बनाने और घरों में ही गीले कचरे से खाद बनाने के लिए नागरिकों को प्रशिक्षित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

तकनीक और कड़े अनुशासन से सुधरेगी व्यवस्था

नगर निगम उपायुक्त योगेंद्र सिंह पटेल ने तकनीकी सुधारों पर बल देते हुए कहा कि अब हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। कचरा संग्रहण वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य की जाएगी ताकि उनका रूट चार्ट और रीयल टाइम लोकेशन पता चल सके। सफाई मित्रों की हाजिरी बायोमैट्रिक मशीन से होगी और वार्ड स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जो लोग बार-बार समझाने पर भी गंदगी फैलाते हैं या सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग करते हैं, उन पर ‘पॉइंट ऑफ सेल’ (पीओएस) मशीन के माध्यम से तुरंत चालानी कार्यवाही की जाए। संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए उन्होंने वरिष्ठ कार्यालय को पत्र लिखने और आवश्यक उपकरण जुटाने का आश्वासन भी दिया।

सुंदरता और हरियाली से महकेंगे शहर के चौराहे

बाजारों के निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने चौराहों और डिवाइडरों के सौंदर्यीकरण पर भी चर्चा की। निर्देश दिए गए कि डिवाइडरों की नियमित सफाई की जाए और वहां सुंदर गमले व आकर्षक लाइटिंग लगाई जाए ताकि शहर की सुंदरता में निखार आए। अतिक्रमण मुक्त चौपाटी और स्वच्छ सड़कें ही उन्हेल की नई पहचान बनेंगी। इस महत्वपूर्ण दौरे में सहायक आयुक्त राघवेंद्र सिंह पलिया, स्वास्थ्य अधिकारी प्रवीण मुक्ति, आनंद विजय सिंह राठौड़ सहित उन्हेल नगर परिषद के सीएमओ जितेंद्र राणा और उनकी पूरी टीम मौजूद रही। सफाई मित्रों और दरोगाओं ने भी इस संकल्प में अपनी सहभागिता निभाते हुए उन्हेल को प्रदेश का आदर्श नगर बनाने का भरोसा दिलाया।

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