धार, अग्निपथ। पीथमपुर निवेश क्षेत्र योजना, जो मध्य प्रदेश औद्योगिक केंद्र विकास निगम (एमपीआईडीसी) की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है, वर्तमान में एक बड़े फर्जीवाड़े के कारण चर्चा में है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही इस योजना में भ्रष्टाचार और अनियमितता का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस मामले में विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए प्रभारी कार्यपालन यंत्री को निलंबित कर दिया है।
जाली दस्तावेजों से जारी की एनओसी
एमपीआईडीसी के भोपाल कार्यालय में पदस्थ प्रभारी कार्यपालन यंत्री मार्तण्ड सिरोलिया पर पीथमपुर निवेश क्षेत्र में निजी व्यक्तियों से सांठ-गांठ कर एक जमीन मालिक के पक्ष में फर्जी अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) जारी करने का आरोप है। सिरोलिया ने कार्यालय के लेटरहेड और दस्तावेजों का दुरुपयोग करते हुए वरिष्ठ अधिकारी के जाली हस्ताक्षर किए। इस फर्जी एनओसी के आधार पर संबंधित जमीन मालिक ने कलेक्टर कार्यालय से पेट्रोलियम पदार्थ के भंडारण की अनुमति भी प्राप्त कर ली थी।
गैस डिपो बनाने की थी तैयारी
जांच में यह तथ्य सामने आया कि विवादित जमीन को अवंतिका गैस लिमिटेड को गैस भंडारण डिपो बनाने के लिए देने की योजना थी। 12 हजार 500 हेक्टेयर में फैली इस विशाल परियोजना में औद्योगिक, आवासीय और व्यावसायिक भूखंडों का समावेश है। इस पूरी भूमि के संबंध में अनुमति जारी करने का एकाधिकार केवल एमपीआईडीसी के पास है। फर्जी एनओसी के जरिए सीधे औद्योगिक उपयोग की राह आसान करने की कोशिश की जा रही थी।
विभाग की त्वरित दंडात्मक कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए इंदौर क्षेत्रीय कार्यालय के कार्यकारी संचालक हिमांशु प्रजापति ने आंतरिक जांच के आदेश दिए। जांच में दोषी पाए जाने पर सिरोलिया को निलंबित करने का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया। प्रबंध संचालक एमपीआईडीसी ने त्वरित कार्यवाही करते हुए 23 अप्रैल 2026 को कूट रचित दस्तावेज तैयार करने और अवैध पारितोषिक प्राप्त करने के आरोप में मार्तण्ड सिरोलिया को निलंबित कर दिया। प्रशासन ने कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी की गई अनुमति को भी तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।
