नगर पालिका परिषद महिदपुर द्वारा संपत्तियों के नामांतरण शुल्क में की गई बेतहाशा वृद्धि ने शहर में विवाद का रूप ले लिया है। परिषद द्वारा पारित हालिया प्रस्ताव के विरोध में स्थानीय अधिवक्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है। इस निर्णय को मनमाना और अवैधानिक करार देते हुए अधिवक्ता संघ के प्रतिनिधियों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को लिखित आपत्ति दर्ज कराई है।
मनमाने शुल्क से जनता पर बढ़ेगा बोझ
नगर पालिका परिषद ने विगत दिनों एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें नामांतरण शुल्क को संशोधित किया गया है। पूर्व में निर्धारित 2,000 रुपये के शुल्क को बढ़ाकर अब न्यूनतम 4,000 रुपये कर दिया गया है। इतना ही नहीं, परिषद ने रजिस्ट्री मूल्यांकन का 1 प्रतिशत शुल्क वसूलने का भी निर्णय लिया है। अधिवक्ताओं का तर्क है कि जब जनता पहले से ही विक्रय पत्र (रजिस्ट्री) करवाते समय नगर पालिका मद में 3 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी का भुगतान कर रही है, तो उसके ऊपर 1 प्रतिशत का अतिरिक्त भार डालना पूरी तरह से अनुचित है।
कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन
मुख्य नगर पालिका अधिकारी राजा यादव को सौंपी गई आपत्ति में अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि रजिस्ट्री मूल्यांकन के आधार पर प्रतिशत में शुल्क वसूलना वैधानिक रूप से गलत है। नगर की जनता पर इस प्रकार का दोहरा कर अधिरोपित करना उनकी आर्थिक स्थिति पर प्रहार है। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस जनविरोधी प्रस्ताव को वापस नहीं लिया गया, तो इसके विरुद्ध कानूनी स्तर पर भी संघर्ष किया जाएगा।
प्रबुद्ध वर्ग और अधिवक्ताओं ने जताई आपत्ति
इस अवसर पर नगर के वरिष्ठ अधिवक्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर इस निर्णय का विरोध किया। ज्ञापन सौंपने के दौरान पूर्व अधिवक्ता संघ अध्यक्ष सुरेश छजलानी, पूर्व सचिव दीपक लश्करी, वर्तमान सचिव शंकरसिंह तोमर और पूर्व सचिव भगवतीप्रसाद पुरोहित प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। साथ ही संतोष पांचाल, पूर्व सहसचिव अमित लश्करी, दिनेश राठौर तथा वरिष्ठ पत्रकार शांतिलाल छजलानी ने भी नगर पालिका के इस निर्णय को जनहित के विरुद्ध बताया।
नगर पालिका प्रशासन की इस कार्रवाई से आम नागरिकों में भी असंतोष व्याप्त है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस व्यापक विरोध के बाद अपने निर्णय पर पुनर्विचार करता है या नहीं।
