नर्मदा के पानी से बुझी उज्जैन की प्यास, गंभीर डैम का जलस्तर स्थिर होने से टला बड़ा जलसंकट

उज्जैन में जल संकट गहराया गंभीर डेम

उज्जैन, अग्निपथ। भीषण गर्मी के बीच शहर के माथे से पानी का संकट पूरी तरह टल गया है। मई के महीने में ही गंभीर डैम में पानी तेजी से कम होने लगा था, जिससे शहर में हाहाकार मचने की स्थिति बन गई थी। लेकिन जनप्रतिनिधियों के कड़े रुख और सूझबूझ के चलते नर्मदा नदी का पानी गंभीर डैम में लाना शुरू कर दिया गया, जिसका बड़ा और सकारात्मक असर अब दिखने लगा है।

विगत दो दिनों से गंभीर डैम का वाटर लेवल एक ही आंकड़े पर पूरी तरह स्थिर बना हुआ है। इसका मुख्य कारण यह है कि क्षिप्रा लिंक परियोजना के माध्यम से नर्मदा का प्रतिदिन करीब 7 एमसीएफटी (मिलियन क्यूबिक फीट) पानी लगातार डैम में पहुंच रहा है। इस व्यवस्था से डैम का घटता जलस्तर रुक गया है और शहर में पानी की किल्लत पूरी तरह खत्म हो गई है।

जनप्रतिनिधियों ने नकारी एक दिन छोड़कर जलप्रदाय की सलाह

मई महीने के दूसरे सप्ताह में गंभीर डैम का जलस्तर खतरनाक स्तर तक नीचे चला गया था। स्थिति का जायजा लेने के लिए सत्ता पक्ष के विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, महापौर मुकेश टटवाल, जलकार्य समिति प्रभारी प्रकाश शर्मा और निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा सहित तमाम आला अधिकारी और जनप्रतिनिधि डैम पर पहुंचे थे।

वहां मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने डैम की बेहद पतली हालत को देखते हुए जनप्रतिनिधियों को शहर में एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई करने की सलाह दी थी। अधिकारियों का मानना था कि ऐसा करने से जुलाई तक पानी बचाया जा सकेगा। लेकिन मौके पर मौजूद जनप्रतिनिधियों ने जनता की परेशानी को देखते हुए इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया।

साख बचाने और जनता को राहत देने के लिए तुरंत लिया फैसला

दौरे पर गए जनप्रतिनिधियों का साफ कहना था कि बाबा महाकाल की नगरी और मुख्यमंत्री के शहर में यदि पानी की कटौती की गई, तो इससे सरकार और भाजपा की छवि पर बेहद विपरीत असर पड़ेगा। जनता को परेशान होने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। लिहाजा, तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था तलाशने के निर्देश दिए गए।

शहर को संकट से उबारने के लिए नर्मदा लिंक परियोजना के जरिए पानी को अंबोदिया डैम में छोड़ने का निर्णय लिया गया। युद्धस्तर पर शुरू हुए इस काम का नतीजा यह रहा कि पिछले दो दिनों से गंभीर डैम का जलस्तर 401.530 एमसीएफटी पर मजबूती से टिका हुआ है, जिससे प्रशासन ने बड़ी राहत की सांस ली है।

हर दिन 8 एमसीएफटी पानी की खपत, जुलाई में खड़ा हो जाता बड़ा संकट

सामान्य दिनों में पूरे उज्जैन शहर की प्यास बुझाने के लिए नगर निगम द्वारा प्रतिदिन लगभग 8 एमसीएफटी पानी की सप्लाई की जाती है। यदि समय रहते नर्मदा का जल गंभीर डैम में नहीं लाया जाता, तो जुलाई माह के पहले सप्ताह में शहर के सामने भयावह जलसंकट खड़ा हो जाता और त्राहि-त्राहि मच जाती।

मुख्यमंत्री का गृह नगर होने और स्थानीय नेताओं के दृढ़ निश्चय के कारण ही उज्जैन के नागरिकों को इस झुलसाती गर्मी में भी बिना किसी कटौती के रोजाना शुद्ध पेयजल मिल पा रहा है। गौरतलब है कि पिछले साल भी गर्मी के मौसम में ऐसी ही स्थिति बनी थी, तब भी नर्मदा के पानी को गंभीर डैम में लाकर संकट संभाला गया था।

आंकड़ों का खेल: डेड स्टोरेज के पास पहुंच गया था डैम का पानी

गंभीर डैम की कुल पानी संग्रहण क्षमता 2250 एमसीएफटी है। इस साल 18 मई तक डैम में केवल 494.146 एमसीएफटी पानी ही बचा था। इसमें से अगर 70 एमसीएफटी डेड स्टोरेज (वह पानी जिसे निकाला नहीं जा सकता) को हटा दें, तो शहर को सप्लाई करने के लिए केवल 424.146 एमसीएफटी पानी ही बच रहा था।

इसके बाद लगातार सप्लाई के कारण पानी घटता गया। 19 मई को डैम में 486.308 एमसीएफटी पानी बचा था, जिसमें से 7.838 एमसीएफटी पानी सप्लाई हुआ। पानी का स्तर लगातार गिरते हुए 31 मई को 401.530 एमसीएफटी पर आ गया था। लेकिन 1 जून को भी यह इसी स्तर पर रहा, क्योंकि नर्मदा का 172 एमएलडी (7 एमसीएफटी) पानी रोज इसमें मिलने लगा।

पेयजल संकट से मिली स्थाई मुक्ति

नगर निगम के जलकार्य समिति प्रभारी प्रकाश शर्मा ने शहर की जलप्रदाय व्यवस्था को लेकर आश्वस्त किया है। उनका कहना है कि गंभीर डैम में अब पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध है और चिंता की कोई बात नहीं है। नर्मदा का जल समय पर डैम में पहुंच जाने से जलस्तर मेंटेन हो गया है और उज्जैन को पेयजल संकट से पूरी तरह मुक्ति मिल गई है।

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