मंगल 21 जून को करेगा वृषभ राशि में प्रवेश, शनि की दृष्टि से बाजार मौसम और वैश्विक राजनीति में मचेगी उथल-पुथल

मंगल

उज्जैन, अग्निपथ। वर्ष 2026 के उत्तरार्ध की शुरुआत एक बड़े और संवेदनशील ज्योतिषीय घटनाक्रम के साथ होने जा रही है। नवग्रहों के सेनापति माने जाने वाले मंगल देव आगामी 21 जून को मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे।

मंगल देव इस राशि में 1 अगस्त तक विराजमान रहकर चराचर जगत को प्रभावित करेंगे। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस गोचर के दौरान वृषभ राशि में बैठे मंगल पर न्याय के देवता शनि देव की सीधी दृष्टि रहेगी।

शनि-मंगल के गठजोड़ से डगमगाएगी वैश्विक अर्थव्यवस्था

श्री मातंगी ज्योतिष केंद्र उज्जैन के प्रख्यात ज्योतिर्विद पं. अजय कृष्णशंकर व्यास के अनुसार ज्योतिष शास्त्र में शनि और मंगल के इस संबंध को बेहद प्रभावशाली और विस्फोटक माना गया है। इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, कृषि, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और आम जनजीवन पर व्यापक रूप से दिखाई देगा।

चूंकि वृषभ राशि को कालपुरुष की कुंडली में धन, कोष और संचित संसाधनों का भाव माना जाता है, इसलिए मंगल का यह गोचर वित्तीय जगत में बड़े उलटफेर के संकेत दे रहा है। ज्योतिर्विद पं. व्यास ने बताया कि मंगल पर शनि की क्रूर दृष्टि वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी और दबाव को बढ़ा सकती है।

शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट में मचेगा तहलका

इस ज्योतिषीय प्रभाव के कारण आने वाले दिनों में खाद्यान्न, सोना, चांदी, तांबा, क्रूड ऑयल और सीमेंट-सरिया जैसी आवश्यक वस्तुओं के दामों में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। बाजार की चाल इस दौरान काफी अनिश्चित और अप्रत्याशित हो सकती है।

बाजार के जानकारों और निवेशकों को इस अवधि में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। ज्योतिषीय सलाह के अनुसार निवेशकों को बाजार में किसी भी तरह की सट्टेबाजी या जल्दबाजी में बड़े पूंजी निवेश से पूरी तरह बचना चाहिए।

आर्थिक नुकसान से बचने के लिए अल्पकालिक लाभ वाले सौदों की जगह दीर्घकालिक निवेश पर ध्यान केंद्रित करना अधिक फायदेमंद रहेगा। जोखिम भरे क्षेत्रों में सोच-समझकर ही कदम बढ़ाएं ताकि आपकी जमा पूंजी सुरक्षित रह सके।

मौसम का बदलेगा मिजाज और कृषि जगत में खड़ी होंगी नई चुनौतियां

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वृषभ एक पृथ्वी तत्व की प्रधान राशि है, जिसका सीधा संबंध हमारी कृषि, भूमि और प्रकृति से होता है। इस राशि में अग्नि तत्व प्रधान मंगल के आने से मौसम के मिजाज में अप्रत्याशित और बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

इस गोचर के प्रभाव से देश और दुनिया के मौसम चक्र में असंतुलन पैदा हो सकता है। कहीं-कहीं प्री-मानसून की गतिविधियां तेज होंगी और अच्छी बारिश दर्ज की जाएगी, तो वहीं कुछ हिस्सों में सूखे या अतिवृष्टि जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।

प्रकृति के इस बदलते रुख के कारण देश के कृषि क्षेत्र में चुनौतियां बढ़ सकती हैं। किसानों को अपनी फसलों को मौसमी मार से बचाने के लिए अभी से वैज्ञानिक और पारंपरिक तौर-तरीकों का सहारा लेना शुरू कर देना चाहिए।

आने वाले संकट को देखते हुए जल संरक्षण, उचित जल निकासी और बेहतर फसल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना समय की मांग है। प्राकृतिक आपदाओं या कीटों के हमले से फसलों को सुरक्षित रखने के उपाय पहले से ही कर लेने चाहिए।

सीमा पर भड़केगी तनाव की चिंगारी और कूटनीतिक मोर्चे पर बढ़ेगी हलचल

प्राचीन ज्योतिषीय ग्रंथों में मंगल और शनि के बीच बनने वाले किसी भी संबंध को संघर्ष, विवाद, दुर्घटना और सैन्य शक्ति प्रदर्शन का मुख्य कारक माना गया है। यह योग कूटनीतिक मोर्चे पर राष्ट्रों के धैर्य की कड़ी परीक्षा लेगा।

उज्जैन के ज्योतिष शास्त्री पं. अजय कृष्णशंकर व्यास के मुताबिक इस विशेष अवधि में विभिन्न देशों के बीच आपसी कड़वाहट और सीमा विवाद की पुरानी घटनाएं दोबारा भड़क सकती हैं। पड़ोसी देशों के साथ सरहद पर सैन्य गतिविधियां और तनाव बढ़ने की पूरी आशंका है।

वैश्विक मंचों पर इस दौरान आंतरिक सुरक्षा, रक्षा सौदों और सामरिक नीतियों पर गंभीर और गहन चर्चाएं होंगी। कई बड़े शक्तिशाली देश अपने रक्षा बजट और सैन्य रणनीतियों में अचानक बड़ा बदलाव कर दुनिया को चौंका सकते हैं।

युद्ध जैसे किसी भी गंभीर संकट को टालने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति दूतों और कूटनीतिक प्रयासों में तेजी लानी पड़ेगी। वैश्विक संगठनों को इस समय बेहद सतर्क रहकर आपसी संवाद के जरिए विवादों को सुलझाना होगा।

शिक्षा व्यवस्था में होंगे कड़े सुधार और युवाओं में बढ़ेगा मानसिक तनाव

मंगल का यह राशि परिवर्तन देश के बच्चों और युवाओं से जुड़े संवेदनशील विषयों पर भी कुछ नई चुनौतियां पेश कर रहा है। शिक्षा पद्धतियों और युवाओं के सर्वांगीण विकास पर इस दौरान सरकारों का ध्यान विशेष रूप से केंद्रित होगा।

देश की शिक्षा व्यवस्था और शैक्षणिक संस्थानों में कुछ कड़े सुधारात्मक और नीतिगत कदम उठाए जा सकते हैं। इस बदलाव का असर आने वाले समय में छात्र-छात्राओं के करियर और उनकी अध्ययन शैली पर भी साफ तौर पर दिखाई देगा।

दूसरी ओर, ग्रहों का यह योग युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में अभिभावकों को अपने बच्चों की दिनचर्या, उनके खान-पान, उचित पोषण और बढ़ते डिजिटल तनाव पर विशेष नजर रखनी होगी।

अभिभावक ध्यान दें कि बच्चे इस अवधि में चिड़चिड़ेपन या अवसाद का शिकार न हों। उन्हें लगातार प्रेरित करते रहें और उनकी समस्याओं को सुनकर उनका उचित मार्गदर्शन करें ताकि वे अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगा सकें।

संकट के बादलों को छांटने के लिए ज्योतिर्विद के अचूक और सरल उपाय

वृषभ राशि में बनने वाले इस गोचर के संभावित नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए श्री मातंगी ज्योतिष केंद्र उज्जैन के ज्योतिर्विद पं. व्यास ने कुछ बेहद प्रभावी और सरल पारंपरिक उपाय सुझाए हैं, जिन्हें कोई भी आसानी से कर सकता है।

ग्रह जनित दोषों से मुक्ति के लिए जातकों को प्रत्येक मंगलवार के दिन हनुमान मंदिर जाकर हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ श्रद्धापूर्वक करना चाहिए। हनुमान जी की आराधना से मंगल के अशुभ प्रभावों में भारी कमी आती है।

इसके साथ ही शनिवार के दिन शनि देव को प्रसन्न करने के लिए गरीबों, असहायों या जरूरतमंदों को अपनी सामर्थ्य अनुसार भोजन कराएं। उन्हें काले तिल, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ फलदायी रहेगा।

नियमित रूप से प्रकृति की सेवा करें और गौ-माता को हरी घास या रोटी खिलाएं। इस पूरी अवधि के दौरान अकारण के वाद-विवाद, अदालती मामलों और पारिवारिक झगड़ों से बचने के लिए अपनी वाणी, व्यवहार और क्रोध पर पूरा नियंत्रण रखना बेहद आवश्यक है।

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