उज्जैन, अग्निपथ। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट राम बिलास गुप्ता की कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर भगाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के जुर्म में 19 वर्षीय आरोपी युवक को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
विशेष कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी पर ₹11,000 का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने साफ किया कि मासूमों के खिलाफ ऐसे जघन्य अपराधों में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।
मामी के घर जाने का कहकर निकली थी पीड़िता
घटना 15 अक्टूबर 2024 की है, जब पीड़िता अपनी मामी के घर जाने का बोलकर निकली थी। शाम तक जब वह घर वापस नहीं लौटी, तो परेशान परिजनों ने उसकी हर संभावित जगह तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।
घबराए माता-पिता ने इसके बाद स्थानीय थाने में बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिजनों की शिकायत के बाद हरकत में आई पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों की मदद से तुरंत बालिका की तलाश शुरू कर दी थी।
मंदिर में जबरन शादी और गुजरात में दरिंदगी
जांच में सामने आया कि धार जिले के बदनावर का रहने वाला आरोपी अंकुश खराडी नाबालिग को बहला-फुसलाकर रतलाम के सातरुंडा माता मंदिर ले गया था। वहां उसने पीड़िता से अवैध रूप से जबरन शादी रचाई और फिर उसे लेकर गुजरात फरार हो गया।
गुजरात में आरोपी ने नाबालिग की मर्जी के खिलाफ उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी के चंगुल से पीड़िता को सुरक्षित दस्तयाब किया। थाने में महिला पुलिस अधिकारी के सामने दिए बयानों में पीड़िता ने पूरी आपबीती सुनाई।
पॉक्सो एक्ट के तहत कोर्ट ने सुनाई सख्त सजा
पुलिस ने पीड़िता के बयानों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पॉक्सो एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया था। मजबूत चार्जशीट और पुख्ता गवाहों के दम पर अभियोजन पक्ष ने अदालत में आरोपी का अपराध अकाट्य रूप से साबित कर दिया।
अदालत ने आरोपी अंकुश को पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत 20 साल, धारा 137(2) में 3 साल और धारा 87 के तहत 6 साल के सश्रम कारावास की सजा से दंडित किया है।

