3 दिन में सफाई न होने पर जन आंदोलन की चेतावनी
सीहोर। शहर की जीवनदायिनी सीवन नदी इन दिनों प्रशासनिक उदासीनता और निजी कंपनी की घोर लापरवाही के कारण गहरे संकट में है। गेल गैस कंपनी द्वारा नदी के जल क्षेत्र में की गई अधूरी खुदाई और उसके बाद छोड़े गए भारी-भरकम मलबे ने स्थानीय नागरिकों की रातों की नींद उड़ा दी है। मानसून की शुरुआत हो चुकी है और नदी के बीचों-बीच जमा यह कचरा पानी के प्राकृतिक प्रवाह को पूरी तरह रोक रहा है।
जलभराव के इस गंभीर खतरे को देखते हुए पूर्व पार्षद आशीष गहलोत ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने कंपनी के गैर-जिम्मेदार अधिकारियों को दो टूक शब्दों में तीन दिन का अंतिम अल्टीमेटम जारी किया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि तय समय-सीमा के भीतर नदी को मलबे से मुक्त नहीं किया गया, तो पूरी लापरवाही के खिलाफ उग्र जन आंदोलन छेड़ा जाएगा।
गर्मी में सोता रहा प्रशासन, बारिश आते ही शुरू कर दी नदी में खुदाई
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि कंपनी को पूरे चार महीने की भीषण गर्मी में नदी में खुदाई करने की याद नहीं आई। जैसे ही आसमान में मानसूनी बादल छाए और बारिश का मौसम शुरू हुआ, नागरिकों के कड़े विरोध के बावजूद नदी के सीने को छलनी करना शुरू कर दिया गया।
बिना किसी दूरदर्शिता के किए गए इस कार्य के कारण अब नदी के भीतर एक कृत्रिम और स्थाई बांध जैसी खतरनाक स्थिति बन गई है। खुदाई से निकले भारी पत्थरों और मलबे को वहीं छोड़ दिया गया है। जानकारों का कहना है कि इन पत्थरों को तुरंत हटाना बेहद जरूरी है, वरना पानी का निकास पूरी तरह बंद हो जाएगा।
निचली बस्तियों पर मंडराया तबाही का खतरा, गंगाश्रम और बढ़ियाखेड़ी में बाढ़ की आशंका
नदी के भीतर जमा इस मलबे के कारण केवल जलधारा ही प्रभावित नहीं हो रही है, बल्कि शहर की एक बड़ी आबादी पर सीधे तौर पर संकट मंडराने लगा है। यदि आगामी दिनों में जिले में तेज बारिश होती है, तो सीवन नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ेगा। पानी आगे न बढ़ पाने के कारण पीछे की तरफ का दबाव बस्तियों को डुबो देगा।
क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों के अनुसार, इस रुकावट के चलते गंगाश्रम और बढ़ियाखेड़ी सहित नदी के आसपास की तमाम निचली बस्तियों में बाढ़ का गंदा पानी घुस सकता है। यह पानी क्षेत्र में भारी तबाही मचा सकता है, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान होने की पूरी आशंका बनी हुई है। प्रशासन इस संभावित खतरे को जानकर भी अनजान बना हुआ है।
दो टूक चेतावनी: तीन दिन में स्थल को पूर्व स्थिति में लाए संबंधित कंपनी
इलाके के वरिष्ठ नागरिक ईश्वर सिंह ठाकुर और मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि नदी के किनारों और पानी के भीतर बड़ी मात्रा में मिट्टी के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगे हुए हैं। यह पूरी तरह से पानी के प्राकृतिक बहाव के रास्ते में एक बड़ी बाधा है। मानसून के इस संवेदनशील समय में किसी भी स्तर पर ऐसी जानलेवा लापरवाही को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
संबंधित निर्माण कंपनी को स्थानीय लोगों की ओर से लिखित और मौखिक रूप से स्पष्ट निर्देश दे दिए गए हैं। कंपनी को तीन दिन के भीतर नदी के पेटे से पूरा मलबा साफ कर स्थल को उसकी पुरानी और प्राकृतिक स्थिति में लाना होगा। अगर कंपनी ने अपने इस अड़ियल और लापरवाह रवैये में सुधार नहीं किया, तो उन्हें जनता के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।
जन आक्रोश के आगे झुकेगा तंत्र, नागरिकों ने प्रशासन से की प्रभावी कार्रवाई की मांग
सीवन नदी को सीहोर शहर की मुख्य जलधारा और पहचान माना जाता है। हर साल भारी बारिश के दौरान इस नदी का रौद्र रूप देखने को मिलता है और जलस्तर खतरे के निशान को पार कर जाता है। ऐसे में नदी के बीचों-बीच जमा यह मलबा इस बार खतरे को कई गुना अधिक बढ़ाने का काम कर रहा है।
डरे और सहमे हुए स्थानीय नागरिकों ने अब जिला प्रशासन से समय रहते इस मामले में हस्तक्षेप करने और प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि शासन ने इस ओर तुरंत ध्यान नहीं दिया, तो पूर्व पार्षद श्री गहलोत के नेतृत्व में समस्त क्षेत्रवासी सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।

