बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेई

हम सबके लिये यह दुर्भाग्य की बात है कि 21वीं सदी का जब इतिहास लिखा जायेगा तब इस कोरोना का काला अध्याय का भी उसमें जिक्र जरूर होगा। 100 वर्षों बाद जब हमारी आने वाली पीढिय़ां जब हिन्दुस्तान की 21वीं सदी का इतिहास पढ़ेगी तो उसमें ऑक्सीजन के अभाव में सैकड़ों मरीजों के दम तोडऩे, इंजेक्शनों के अभाव से हुयी मौतों, देश के अस्पतालों में वेन्टीलेटर, आई.सी.यू. पलंगों के लिये मरीजों की लंबी लाइनों और मृत्यु पश्चात शमशान में जगह के अभाव में प्रतीक्षा करते मृत शरीरों का बखान होगा।

सबसे अफसोस की बात यह है कि जिस भारत ने आज से 2500 साल पहले सुश्रुत जैसा महान चिकित्साशास्त्री एवं शल्य चिकित्सक दुनिया को दिया हो, वहाँ के यह हालात हुए। सुश्रुत आयुर्वेद के महान ग्रंथ सुश्रुत संहिता के प्रणेता है, और 2500 साल पहले प्लास्टिक सर्जरी की थी।

कोरोना की दोनों लहरों ने सरकार द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार 3 लाख 15 हजार 157 मौतें बतायी गयी है जबकि वास्तविकता में लगभग 40 से 50 लाख भारतीय इस कोरोना का ग्रास बने हैं, शायद ही ऐसा कोई परिवार होगा जिसके मिलने जुलने वाले या नाते रिश्तेदारों को ना खोया हो। खैर जो होना था वह गुजर गया।

बदहाली, बदइंतजामी, अव्यवस्था जरुरी चीजों का अभाव सरकारों को और देशवासियों को बहुत कुछ सिखा गया है। भविष्य में आने वाली कोरोना की तीसरी लहर या इस तरह की अन्य महामारी के लिये हमें अपने आपको तैयार करना होगा। वैसे भी हेल्थ केयर सिस्टम के मामले में हमारे देश की स्थिति दुनिया के 205 देशों में 145वीं है।

केन्द्र एवं राज्य सरकारों की भविष्य में आने वाली आपदाओं को चुनौती मानकर अभी से उनसे निपटने के लिये कारगर योजनाएं बनाकर कार्य शुरू करना होगा। विश्व स्वास्थ संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार 1000 की आबादी पर 1 योग्य चिकित्सक होना चाहिये जबकि हमारे यह औसत 1597 भारतीयों पर एक चिकित्सक है। देश के राज्यों की मेडिकल कौन्सिल में पंजीकृत चिकित्सकों की संख्या 10 लाख 41 हजार 395 है, जबकि वास्तविकता में 8 लाख 33 हजार चिकित्सक ही देश भर में सकिय हैं।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार भारत में अभी 5 लाख डॉक्टरों की कमी है। प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में नर्सों के हजारों पद रिक्त हैं। साथ ही अच्छे चिकित्सक भी विदेश जाने में ज्यादा रुचि ले रहे हैं, वर्ष 2017 की एक रिपोर्ट अनुसार बीते 3 वर्षों में देश के 5129 योग्य विशेषज्ञ चिकित्सक विदेशों में जा बसे हैं। सरकार को चाहिये कि तत्काल ही युद्ध स्तर पर चिकित्सकों के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाय साथ ही नर्सों के पदों को भी भरा जाए, चिकित्सा महाविद्यालय खोलने के लिये नियमों में शिथिलता दी जाकर जो संस्थाएं महाविद्यालय खोलना चाहे उन्हें शासकीय भूमि नाममात्र शुल्क पर उपलब्ध कराकर ऋृण और अनुदान उपलब्ध करवाया जाए।

देशभर के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के भवनों का सर्व शिक्षा अभियान की तरह भवनों का जीर्णोद्वार करवाया जाए साथ ही उन्हें संसाधनों से लैस किया जाए। दवा निर्माता कंपनियों को भी शासकीय मदद दी जाकर उनके उन्नयन के प्रयास किये जाए। स्वास्थ्य के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के लिए जनप्रतिनिधियों की मदद से महाअभियान छेड़ा जाये। अस्पतालों के साथ ऑक्सीजन प्लॉट स्थापना की अनिवार्यता हेतु निराम बनाये जाये, वेन्टीलेटर एवं आईसीयू पलंगों का निर्माण हो, यदि सरकार यह सब कर सकी तभी देश भविष्य में आने वाली आपदाओं का मुकाबला कर सकेगा। वर्तमान समय को गवायें बिना अभी से शुरुआत होगी तभी स्वास्थ्य सेवाओं में ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाया जा सकेगा।

– अर्जुनसिंह चंदेल

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