लहसुन की फसल पर मंडराया संकट: रोगों ने बढ़ाई किसानों की चिंता

धार, अग्निपथ। इस वर्ष धार क्षेत्र के किसानों ने ऊंचे दामों पर लहसुन का बीज खरीदकर बड़े उत्साह के साथ बुवाई की थी। किसानों को उम्मीद थी कि पककर तैयार होने वाली फसल उन्हें अच्छा मुनाफा देगी, लेकिन अब खेतों में पकने के कगार पर खड़ी लहसुन की फसल पर बीमारियों का ग्रहण लग गया है। क्षेत्र में लहसुन की फसल में पीलापन आने और जड़ों व तने में फफूंद लगने की समस्या तेजी से फैल रही है। इसके चलते किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। वर्तमान में बदलता मौसम, विशेषकर ठंड के साथ तापमान में अचानक बढ़ोतरी, इस बीमारी का मुख्य कारण माना जा रहा है।

थ्रिप्स और फंगस का दोहरा हमला

लहसुन की फसल को इन दिनों थ्रिप्स और फंगस जैसी बीमारियों ने जकड़ लिया है। किसानों का कहना है कि वे तीन से चार बार महंगी दवाइयों का छिड़काव कर चुके हैं, इसके बावजूद बीमारी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले दिनों मौसम में आए बदलाव और खराब मौसम की वजह से फसलों पर यह खतरा मंडरा रहा है। भारी निवेश और महंगे बीज के कारण किसान पहले ही आर्थिक दबाव में हैं, और अब फसल खराब होने के डर ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है।

प्रति बीघा 40 से 45 हजार रुपये का खर्च

ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों ने बताया कि जिन किसानों के पास खुद का बीज था, उन्हें भी प्रति बीघा करीब 40 से 45 हजार रुपये का खर्च उठाना पड़ रहा है। इस बार अच्छी बारिश के कारण किसानों का रुझान लहसुन की खेती की ओर अधिक था, जिसके चलते बड़े पैमाने पर बुवाई की गई। किसान रतनलाल यादव (अनारद) और किशोर कामदार (सकतली) ने बताया कि दिसंबर में भी तापमान उच्च स्तर पर रहने से थ्रिप्स कीट का प्रकोप बढ़ गया है। कीटनाशकों के छिड़काव के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है, जिससे लागत निकलना भी मुश्किल लग रहा है।

विशेषज्ञों की सलाह और सावधानियां

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार कच्ची खाद के उपयोग से जड़ों में कीड़े पड़ जाते हैं, जिससे फसल पीली पड़ने लगती है। साथ ही, सर्दी के दिनों में पत्तियों पर ‘सिल्वर’ जैसा कीड़ा लग जाता है, जो बैंगनी दोष रोग का कारण बनता है। इससे बचाव के लिए क्लोरोफिट, कार्बनडॉजिन और मॉनाटोजेफ जैसी दवाओं के छिड़काव की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया है कि कीटनाशक के साथ ‘चिपको’ पदार्थ का उपयोग करें ताकि दवा पत्तियों पर टिकी रहे। जिन फसलों में पीलापन सल्फर की कमी से है, वहां अमोनियम सल्फेट का उपयोग लाभकारी हो सकता है।

जिले में लहसुन की बुवाई का बढ़ता ग्राफ

धार जिले में पिछले कुछ वर्षों में लहसुन की बुवाई के रकबे में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया है, जो इस वर्ष अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है:

वर्षरकबा (हेक्टेयर में)
2021-2216382.00
2022-2312465.00
2023-2412502.00
2024-2513500.00
2025-2614000.00

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