देवास, अग्निपथ। देवास कलेक्टर कार्यालय की साख को बट्टा लगाने वाले एक सनसनीखेज फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। यहाँ अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर और नकली सील का उपयोग कर जमीन अंतरण (भू-राजस्व संहिता की धारा 165-6) के अवैध आदेश धड़ल्ले से जारी किए जा रहे थे। इस गंभीर मामले की जानकारी मिलते ही बीएनपी थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए नजूल शाखा और तहसील कार्यालय के तीन बाबुओं सहित एक बिचौलिये को गिरफ्तार कर लिया है। वर्तमान में एक अन्य आरोपी फरार बताया जा रहा है जिसकी तलाश जारी है।
पंजीयन कार्यालय की सतर्कता से खुला राज
यह पूरा मामला उस समय प्रकाश में आया जब जमीन की रजिस्ट्री के लिए पंजीयन कार्यालय में एक संदिग्ध आदेश पहुँचा। आदेश की प्रमाणिकता पर संदेह होने के बाद जब इसकी बारीकी से जाँच की गई, तो पता चला कि यह आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा ही नहीं है। कलेक्टर की शिकायत पर पुलिस ने जाल बिछाकर सबसे पहले बिचौलिया महेंद्र कुशवाह को अपनी गिरफ्त में लिया। महेंद्र से हुई कड़ी पूछताछ के बाद इस संगठित गिरोह की परतें खुलती चली गईं।
संगठित गिरोह में कार्यालय के बाबू शामिल
पकड़े गए आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने नजूल शाखा के बाबू रमेश लोबानिया, एडीएम कार्यालय के रीडर संजय जाटव और विजयागंज मंडी तहसील के बाबू जितेंद्र भद्रे को धर दबोचा है। प्रारंभिक जाँच में यह तथ्य सामने आया है कि ये आरोपी अधिकारियों की जानकारी के बिना उनके हस्ताक्षरों की हूबहू नकल करते थे और फर्जी सील बनाकर आदेश तैयार कर देते थे। इस कूटरचना के माध्यम से आरोपियों ने अवैध रूप से भारी धन अर्जित किया है।
एक दर्जन से अधिक आदेशों पर संदेह
पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह ने अब तक एक दर्जन से अधिक फर्जी आदेश जारी किए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से एक फर्जी आदेश के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री भी संपन्न हो चुकी है, जिसे अब निरस्त करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एसपी पुनीत गेहलोद ने बताया कि पुलिस इस बात की गहराई से जाँच कर रही है कि यह काला खेल कब से चल रहा था और प्रशासन के भीतर इनके तार और कहाँ-कहाँ जुड़े हैं।
सख्त कार्रवाई और विस्तृत जाँच जारी
सीएसपी सुमित अग्रवाल के अनुसार, आरोपियों ने एक संगठित गिरोह की तरह काम करते हुए सरकारी दस्तावेजों के साथ धोखाधड़ी की है। वहीं, कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने इस घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा है कि प्रशासन की छवि धूमिल करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। मामले की विस्तृत जाँच के आदेश दे दिए गए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति न हो सके।
