नमी के चलते गिरा भगवान महाकाल का भांग शृंगार, यह प्राकृतिक घटना

महाकाल का भांग शृंगार

मंदिर समिति को और कोई नहीं मिला तो पुजारी को थमा दिया नोटिस

उज्जैन, अग्निपथ। महाकाल मंदिर में पिछले दिनों संध्या आरती के पूर्व गर्भगृह में भगवान का भांग शृंगार अचानक से गिर गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि उक्त शृंगार नमी के चलते गिरा है। ऐसा पहले भी कई बार हो चुका हे। क्योंकि गर्भगृह में मौसम के अनुसार नमी रहती है और भांग में पानी की मात्रा होने से ऐसा होता है। लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है कि इस मामले में मंदिर प्रबंध समिति को और कोई नहीं मिला तो उन्होंने शृंगार करने वाले पुजारी को ही नोटिस थमा दिया।

अब बताओ इसमें पुजारी की गलती हो सकती है। यह तो बहुत ही सामान्य बात है प्रतिदिन ही भगवान महाकाल का संध्या के समय परंपरागत रूप से भांग, ड्रायफ्रूट्स आदि तय मात्रा में उपयोग कर पुजारीगण यजमानों की ओर से कराए जाने वाला शृंगार करते हैं।

शाही सवारी वाले दिन पुजारी प्रदीप गुरु ने यह शृंगार किया था। इसके पहले भी इस तरह के शृंगार सैकड़ों बार मंदिर के अन्य पुजारीगण भी कर चुके हैं। लेकिन कुछ एक बार ऐसा होता है जब नमी के चलते भांग गिर जाती है। लेकिन इसमें नुकसान जैसी कोई बात नहीं है। हाथों हाथ ही गर्भगृह में मौजूद पुजारीगण भगवान से क्षमा-याचना कर उसे वापस शृंगारित कर देते हैं। यह एक प्राकृतिक घटना है। इसमें पुजारी को दोषी नहीं ठहरा सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन में 3 किलो भांग का उपयोग

दरअसल महाकाल के शिवलिंग के क्षरण को लेकर पूर्व में जब याचिका दायर हुई थी तो सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्षरण रोकने के लिए गाइड लाइन जारी की थी। जिसमें यह भी कहा गया था कि प्रतिदिन संध्या के समय होने वाले शृंगार में 3 किलो से ज्यादा भांग का उपयोग नहीं किया जाएगा। मंदिर के पुजारीगण तब से अब तक तो इसी नियम का पालन कर भगवान महाकाल का शृंगार करते आए हैं।

प्रशासक बोले- ज्यादा भांग का उपयोग इसलिए दिया नोटिस

मामले में मंदिर समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक का कहना है कि पुजारी को इसलिए नोटिस दिया है कि उन्होंने तय मात्रा से अधिक भांग का उपयोग किया जबकि पुजारी का साफ कहना है कि ऐसा कुछ भी नहीं है जो तय मात्रा है उतनी ही भांग शृंगार में ली गई थी। यह प्रतिदिन का ही क्रम होता है। अब तो पुजारियों को रटा गया है कि शृंगार में कौन सी सामग्री कितनी लेना है।

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