विश्व कल्याण के लिए भारत का विश्वगुरु बनना आवश्यक : अशोक अग्रवाल

संघ शिक्षा वर्ग के प्रकट उत्सव में दिखी संगठन शक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व की मिसाल

शाजापुर, अग्निपथ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मालवा प्रांत के संघ शिक्षा वर्ग (व्यवसायी) का प्रकट उत्सव रविवार को स्थानीय छत्रपति शिवाजी स्टेडियम ग्राउंड, शाजापुर में भव्य एवं अनुशासित वातावरण में सम्पन्न हुआ। प्रकट उत्सव में शिक्षार्थियों द्वारा प्रस्तुत विगत 15 दिनों में सीखे विभिन्न शारीरिक एवं घोष कार्यक्रमों ने जहां उपस्थित जनसमूह को प्रभावित किया, वहीं समाज द्वारा ईंधन बचत एवं सामूहिक परिवहन के प्रति दिखाई गई जागरूकता भी कार्यक्रम की विशेष पहचान बनी।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सामाजिक चिंतक गोवर्धनलाल गुवाहाटिया तथा मुख्य वक्ता अशोक अग्रवाल (मध्य क्षेत्र कार्यवाह) थे। भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

Shajapur sangh pradarshan
शिविर के समापन पर प्रस्तुति देते स्वयंसेवक

प्रकट उत्सव में शिक्षार्थियों ने पूर्ण गणवेश में योग, दंड-योग, समता, आसन, व्यायाम तथा विभिन्न शारीरिक रचनाओं का प्रभावी प्रदर्शन किया। वर्ग की विभिन्न वाहिनियों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों में अनुशासन, सामूहिकता और दक्षता का उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिला। शिक्षार्थियों द्वारा प्रस्तुत सामूहिक गीत ने राष्ट्रभक्ति एवं संगठन भावना का वातावरण निर्मित किया।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण घोष दल रहा। घोष वादन के साथ निर्मित विविध चालित आकृतियों ने उपस्थित नागरिकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। घोष दल की सुसंगठित प्रस्तुति ने संघ के प्रशिक्षण और सामूहिक कार्यपद्धति का प्रभावी परिचय कराया। वर्ग कार्यवाह राधेश्याम पाटीदार ने 15 दिवसीय वर्ग का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री गोवर्धन लाल जी ने अपने संबोधन में कहा कि संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर सभी को शुभकामनाएं संघ स्थापना के समय से ही राष्ट्रभक्ति और सामाजिक समरसता के लिए कार्य कर रहा है मुझे विश्वास है कि संघ समाज में फैली वैमनस्यता को समाप्त कर समरस भारत का निर्माण करेगा!

मुख्य वक्ता अशोक जी अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्थापना काल से ही समाज को संगठित करने और व्यक्ति निर्माण का कार्य कर रहा है। संघ का उद्देश्य केवल संगठन खड़ा करना नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर संस्कार, चरित्र और राष्ट्रभक्ति का भाव जागृत करना है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति संस्कारित होगा तो परिवार, समाज और राष्ट्र भी सशक्त बनेंगे।

अग्रवाल ने कहा कि संघ शाखा के माध्यम से प्रत्येक स्वयंसेवक में अनुशासन, सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व के संस्कारों का बीजारोपण करता है। समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिकों का निर्माण ही संघ का प्रमुख कार्य है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक के मन में समाजभक्ति और देशभक्ति का भाव जागृत होना चाहिए, क्योंकि यही राष्ट्र की प्रगति का आधार है।

उन्होंने कहा कि भारत की गौरवशाली परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत ने सदियों तक विश्व का मार्गदर्शन किया है। भारत को अपनी सांस्कृतिक शक्ति, आध्यात्मिक मूल्यों और जीवन दर्शन के आधार पर विश्व में पुनः अग्रणी भूमिका निभानी होगी।

मुख्य वक्ता ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। महामारी, युद्ध, पर्यावरण संकट और सामाजिक विघटन जैसी समस्याओं ने पूरी मानवता को चिंतित किया है। ऐसे समय में विश्व की दृष्टि भारत की ओर है, क्योंकि भारतीय संस्कृति “वसुधैव कुटुम्बकम्” और मानव कल्याण का संदेश देती है। भारत की आध्यात्मिक संस्कृति ही इन वैश्विक समस्याओं के समाधान का मार्ग प्रस्तुत कर सकती है।

उन्होंने कहा कि विश्व कल्याण के लिए भारत का विश्वगुरु बनना आवश्यक है। भारत केवल आर्थिक या सैन्य शक्ति के आधार पर नहीं, बल्कि अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों के आधार पर विश्व का नेतृत्व कर सकता है। आज भारत पुनः विश्व नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है और यह प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह इस राष्ट्रीय पुनर्जागरण में अपनी भूमिका निभाए।

अशोक अग्रवाल ने संघ द्वारा समाज जीवन में अपनाए जाने वाले पंच परिवर्तन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को परिवार प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्यों के पालन और स्वदेशी भाव को अपने जीवन में उतारना चाहिए। इन परिवर्तनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति को सबसे पहले स्वयं का विकास करना चाहिए, इसके बाद परिवार, कुटुंब, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। जब प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग होगा, तभी राष्ट्र सशक्त बनेगा और भारत विश्व कल्याण के अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगा। उन्होंने कहा की संघ शिक्षा वर्ग केवल प्रशिक्षण का कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज को संगठित जागरूक और उत्तरदाई बनाने की प्रक्रिया है जब समाज छोटे-छोटे विषयों जैसे इंधन बचत, पर्यावरण संरक्षण और सामूहिकता के भाव को अपनाता है तब राष्ट्रहित की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव होता है।

ईंधन बचत और सार्वजनिक परिवहन का प्रेरक संदेश

प्रकट उत्सव की एक महत्वपूर्ण विशेषता समाज द्वारा ईंधन संरक्षण एवं सार्वजनिक परिवहन के संदेश को आत्मसात करना रही। संघ द्वारा कार्यक्रम के पूर्व समाज से आग्रह किया गया था कि अधिकाधिक लोग निजी वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें तथा अनावश्यक ईंधन की खपत को कम करें।

इस आह्वान का व्यापक प्रभाव देखने को मिला। जिले एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में नागरिक बसों एवं अन्य सार्वजनिक साधनों से कार्यक्रम में पहुंचे। अनेक गांवों के लोगों ने समूह बनाकर एक ही वाहन से यात्रा की। वहीं नगर के विभिन्न क्षेत्रों से भी स्वयंसेवक, परिवारजन और नागरिक निजी वाहनों की अपेक्षा पैदल अथवा सार्वजनिक रूप से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे।

इस व्यवस्था के कारण न केवल ईंधन की बचत हुई, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, यातायात व्यवस्था और सामाजिक सहभागिता का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत हुआ। अनेक नागरिकों ने इसे संघ द्वारा समाज जीवन में उत्तरदायित्व और जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक पहल बताया।

कार्यक्रम में मंच पर वर्ग सर्वाधिकारी प्रवीण सैनी और जिला संघ चालक हुकम धनगर उपस्थित थे। प्रकट उत्सव में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, मातृशक्ति, प्रबुद्धजन एवं नगरवासी उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में अनुशासन, व्यवस्था, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

संघ शिक्षा वर्ग का यह प्रकट उत्सव केवल शिक्षार्थियों के प्रशिक्षण प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने संगठित समाज, पर्यावरण संरक्षण, ईंधन बचत और सामूहिक जीवन मूल्यों का भी प्रभावी संदेश समाज के समक्ष प्रस्तुत किया।

 

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