विश्व प्रसिद्ध माँ बगलामुखी मंदिर खतरे में! लखुंदर नदी पर हो रही ‘अनाधिकृत’ ब्लास्टिंग से प्राचीन संरचना को खतरा

नलखेड़ा, अग्निपथ। नलखेड़ा स्थित विश्व प्रसिद्ध माँ बगलामुखी मंदिर पर एक गंभीर संकट मंडरा रहा है। मंदिर के ठीक पीछे लखुंदर नदी पर बन रहे बायपास पुल के निर्माण के लिए ठेकेदार द्वारा की जा रही अंधाधुंध ब्लास्टिंग से मंदिर की प्राचीन संरचना को भारी क्षति पहुँचने की आशंका है। श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों में इस मनमानी को लेकर गहरा आक्रोश और भय व्याप्त है।

सुरक्षा नियमों की खुली अनदेखी

पुल निर्माण कार्य में जुटे ठेकेदार द्वारा खुलेआम ब्लास्टिंग की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, ब्लास्टिंग शुरू करने से पहले ठेकेदार ने मंदिर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संबंधित प्रशासनिक विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना भी ज़रूरी नहीं समझा। यह नियमों का गंभीर उल्लंघन है।

मंदिर से मात्र 500 मीटर की दूरी तक ब्लास्टिंग के तीव्र कंपन महसूस किए जा रहे हैं। पांडवकालीन माने जाने वाले इस प्राचीन मंदिर के लिए ये झटके बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। एक शिलालेख के अनुसार, मंदिर का सभा मंडप ही लगभग सात सौ वर्ष पुराना है। लगातार होने वाले धमाकों और कंपन से इस प्राचीन मूल स्वरूप को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है, जिसकी भरपाई असंभव होगी।

दीवारों में दरार का ख़तरा, जनहानि की आशंका

पुल के लिए नदी में कॉलम खड़े करने हेतु ठेकेदार लगातार ब्लास्टिंग का उपयोग कर रहा है। इससे उत्पन्न कंपन की तीव्रता इतनी अधिक है कि मंदिर की दीवारें तक हिल जाती हैं।

  • जनहानि का खतरा: मंदिर परिसर में देर रात तक श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा रहता है। ऐसे में, बिना सुरक्षा उपायों के की जा रही ब्लास्टिंग के चलते किसी भी समय बड़ी जनहानि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
  • पेयजल व्यवस्था भी संकट में: इस लापरवाही से न केवल मंदिर की संरचना खतरे में है, बल्कि नगर की पेयजल व्यवस्था के लिए मंदिर के पीछे बने स्टाफ डेम की सुरक्षा को भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

स्थानीय नागरिकों का यह भी आरोप है कि ठेकेदार प्रशासनिक जाँच और मीडिया की नज़रों से बचने के लिए रात्रिकालीन समय में चुपके से ब्लास्टिंग करता है।

श्रद्धालुओं की माँग, प्रशासन की चुप्पी क्यों?

श्रद्धालुओं और नगरवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ब्लास्टिंग के कारण माँ बगलामुखी मंदिर के प्राचीन स्वरूप को कोई भी नुकसान पहुँचता है, तो उसकी समस्त जवाबदारी शासन और प्रशासन की होगी। उन्होंने जिला प्रशासन एवं पर्यटन विभाग से तत्काल निम्नलिखित कदम उठाने की माँग की है:

  1. तत्काल प्रभाव से ब्लास्टिंग पर रोक लगाई जाए।
  2. मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम से स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्वे कराया जाए।
  3. ठेकेदार और लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।

यह गंभीर मामला तकनीकी अधिकारियों की लापरवाही और ठेकेदार की मनमानी को उजागर करता है, जिससे क्षेत्र में भय और आक्रोश व्याप्त है।

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