आगर मालवा में आबकारी नियमों की धज्जियाँ: ‘डायरी सिस्टम’ से शासन को लग रहा लाखों का चूना

आगर मालवा, अग्निपथ। आगर मालवा जिले में शराब कारोबार से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, शराब ठेकेदारों ने शासन के नियमों को ताक पर रखकर एक समांतर ‘डायरी सिस्टम’ लागू कर दिया है। इस अवैध व्यवस्था के जरिए न केवल शराब की बेखौफ बिक्री की जा रही है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी चपत लगाई जा रही है।

क्या है यह ‘डायरी सिस्टम’ और कैसे होता है खेल?

जानकारी के मुताबिक, इस सिस्टम के तहत ठेकेदार सेल्समैन पर तय लक्ष्य से कहीं अधिक शराब बेचने का दबाव बनाते हैं। इस अवैध व्यापार का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि वास्तविक बिक्री का पूरा हिसाब सरकारी रिकॉर्ड या ई-पोर्टल पर दर्ज करने के बजाय निजी डायरियों में रखा जाता है। इससे शासन को वास्तविक बिक्री के आंकड़ों का पता नहीं चल पाता और राजस्व की बड़ी चोरी की जा रही है।

ग्रामीण अंचलों और ढाबों पर अवैध सप्लाई का जाल

स्थानीय निवासियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि इस डायरी सिस्टम की आड़ में ग्रामीण क्षेत्रों और हाईवे के ढाबों पर अवैध शराब की गंगा बह रही है।

  • डायरी संचालकों के पास मौजूद पर्चियों के दम पर निर्धारित समय के बाद भी शराब बेची जा रही है।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की सप्लाई तेजी से बढ़ रही है, जहाँ ऊँचे दामों (ओवररेट) पर शराब बेचना अब आम बात हो गई है।

  • आरोप है कि डायरी सिस्टम से जुड़े लोग खुद को विभाग से सुरक्षित मानकर बेखौफ होकर नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

उठ रहे हैं गंभीर सवाल: आखिर किसका है संरक्षण?

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आबकारी नियमों में इस तरह के किसी ‘डायरी सिस्टम’ की कोई वैध जगह है? यदि यह व्यवस्था पूरी तरह अवैध है, तो फिर प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे यह कारोबार कैसे फल-फूल रहा है? आमजन के बीच चर्चा है कि बिना किसी बड़े संरक्षण के इतना बड़ा अवैध नेटवर्क संचालित करना संभव नहीं है।

राजस्व की हानि और अधिकारियों की चुप्पी

आबकारी विभाग समय-समय पर कार्रवाई और नियमित जांच के दावे तो करता है, लेकिन धरातल पर यह डायरी सिस्टम बेरोकटोक जारी है। इस खेल के कारण शासन को हर महीने लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर भ्रष्टाचार पर संज्ञान लेकर कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर यह अवैध तंत्र इसी तरह शासन को चूना लगाता रहेगा।

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