उज्जैन, अग्निपथ। चैत्र मास की पहली जत्रा पर प्रसिद्ध चिंतामण गणेश मंदिर में दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़े। बुधवार से जत्रा का आरंभ हुआ और अब दूसरी जत्रा 11 मार्च को आएगी। सुबह 5 बजे पट खुलने के बाद भगवान का अभिषेक व चोला चढ़ाया गया।
सुबह 5 बजे पट खुलने के बाद भगवान का अभिषेक व चोला चढ़ाया
चिंतामण गणेश मंदिर के पुजारी गणेश गुरु ने बताया कि सुबह 5 बजे मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद भगवान गणेश जी का अभिषेक-पूजन कर चोला श्रृंगार किया गया। भोग लगाकर आरती की गई, जिसके बाद मंदिर में आम दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ। रात तक हजारों की संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश जी के दरबार में मनोकामनाएं लेकर पहुँचे और दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया। चैत्र मास के प्रति बुधवार को जत्रा लगेगी, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु आस्था के साथ उमड़ते हैं।
चैत्र में इस बार 5 बुधवार होने से 5 जत्रा का संयोग
इस बार चैत्र मास में कुल पांच बुधवार आ रहे हैं, इसलिए पांच जत्रा लगेगी। पहली जत्रा संपन्न होने के बाद दूसरी 11 मार्च को, तीसरी 18 मार्च को, चौथी 25 मार्च और पांचवीं व अंतिम जत्रा 1 अप्रैल को आ रही है।
भीड़ के चलते मंदिर प्रशासन ने बाहर से ही दर्शन कराए
जत्रा के दौरान भक्तों की अधिक भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति ने बाहर से ही दर्शन की व्यवस्था रखी। मंदिर समिति के प्रबंधक लखन तिवारी ने बताया कि चैत्र मास की जत्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, छाया के लिए टेंट व कारपेट की व्यवस्था की गई है।
जानिए क्या मान्यताएं हैं चैत्र की जत्रा की
चिंतामण गणेश मंदिर के पुजारी गणेश गुरु जी ने बताया कि चैत्र मास की प्रत्येक जत्रा में श्रद्धालु मनोकामनाएं लेकर आते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन की गई प्रार्थना को भगवान गणपति अवश्य पूर्ण करते हैं। मालवा की परंपरा के अनुसार इस समय क्षेत्र में गेहूं और चने की फसल पक चुकी होती है। किसान अपनी नई उपज को बेचने से पहले भगवान को समर्पित करते हैं। इसी विश्वास के साथ वे जत्रा में भाग लेते हैं।
