वन विभाग की घास बीड़ जमीन पर प्रस्तावित कंपनी का ग्रामीणों ने किया विरोध

एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

धार, अग्निपथ। पीथमपुर तहसील के ग्राम अकोलिया और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में वन विभाग की घास बीड़ भूमि पर प्रस्तावित कंपनी निर्माण को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस संवेदनशील मामले को लेकर ग्रामीणों ने एकजुट होकर कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की पुरजोर मांग की गई है। ज्ञापन में ग्रामीणों ने विस्तार से बताया कि अकोलिया सहित आसपास के गांव खांडवा, जामगोदी और झांकरवाला सहित अन्य क्षेत्रों के हजारों लोग लंबे समय से इस घास बीड़ भूमि पर पूरी तरह निर्भर हैं। यह भूमि क्षेत्र के पशुपालकों के लिए चारे का प्रमुख स्रोत होने के साथ-साथ स्थानीय पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि इस सरकारी भूमि पर कंपनी निर्माण की योजना न केवल उनके पारंपरिक अधिकारों पर आघात करेगी, बल्कि पशुपालन, स्थानीय जल स्रोतों और पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचाएगी। बुजुर्ग ग्रामीणों ने यह भी बताया कि वर्ष 2007 तक इस क्षेत्र से ग्रामीणों को सरकारी नियमों के तहत नियमित रूप से घास प्राप्त होती रही है, जिससे उनकी आजीविका सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। अब यहाँ कंपनी स्थापित होने से उनके पशुओं के सामने चारे का संकट खड़ा हो जाएगा।

पशुपालकों की आजीविका और पर्यावरण पर मंडराया संकट

ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस घास बीड़ भूमि पर निर्माण कार्य किया जाता है, तो इससे न केवल अकोलिया बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के पशुपालकों और छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति पूरी तरह बिगड़ जाएगी। चरागाह खत्म होने से पशुपालन का व्यवसाय चौपट हो जाएगा। इसके अलावा यहाँ होने वाले औद्योगिक निर्माण से जल संरक्षण की व्यवस्था और क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा, जिससे भविष्य में सूखे जैसी स्थिति निर्मित हो सकती है।

जनसुनवाई में दर्ज कराई आपत्ति और आंदोलन की चेतावनी

मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे और वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने मांग की कि प्रस्तावित कंपनी निर्माण को जनहित में तत्काल निरस्त किया जाए और बिना ग्रामवासियों की सहमति के किसी भी प्रकार की नई कार्रवाई न की जाए। ग्रामीणों ने ज्ञापन में स्पष्ट उल्लेख किया है कि वन भूमि और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। इस अवसर पर अकोलिया और आसपास के गांवों के लोग बड़ी संख्या में एकजुट नजर आए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया और चरागाह की जमीन को कंपनियों के हवाले किया गया, तो वे आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

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