धार, अग्निपथ। शहर में शासकीय निधि से निर्मित अंतरराष्ट्रीय स्तर के तरणताल में सोमवार रात क्लोरीन गैस के रिसाव से हड़कंप मच गया। रात करीब 8 बजे हुए इस हादसे के दौरान कई बच्चे पूल में तैराकी का अभ्यास कर रहे थे। अचानक गैस पाइपलाइन से रिसाव होने के कारण बच्चों को सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी और वे पानी के भीतर ही छटपटाने लगे। मौके पर मौजूद परिजनों और कोच ने तत्परता दिखाते हुए बच्चों को बाहर निकाला। इस घटना में दो बच्चों की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें खतरे से बाहर बताया है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही
स्विमिंग पूल में पानी को कीटाणुरहित करने के लिए क्लोरीन का उपयोग किया जाता है, जो हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस को नष्ट करता है। नियमानुसार इसकी प्रतिदिन सुबह-शाम जांच होनी चाहिए, लेकिन इस हादसे ने सुरक्षा मानकों पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गैस की गंध इतनी तीव्र थी कि पूल के आसपास मौजूद अभिभावकों को भी खांसी और बेचैनी होने लगी। बिना पुलिस वेरिफिकेशन के कर्मचारी रखने और आपात स्थिति में प्रबंधन के भाग खड़े होने से मामला और संदिग्ध हो गया है।
विवादों का केंद्र बना अंतरराष्ट्रीय तरणताल
यह स्विमिंग पूल अपनी स्थापना के समय से ही विवादों का केंद्र रहा है। आदिवासी बाहुल्य जिले में 2,500 रुपये प्रति माह का अत्यधिक शुल्क वसूलने को लेकर पहले भी कड़ा विरोध हो चुका है। इसके अतिरिक्त, परिसर में मारपीट की घटनाएं और योग्य प्रशिक्षकों की कमी की शिकायतें प्रशासन तक पहुंचती रही हैं। अब गैस रिसाव की इस बड़ी लापरवाही ने स्थानीय जनता के मन में डर पैदा कर दिया है, जिससे लोग अब यहां आने से कतराने लगे हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल
शहर की सुविधा के लिए करोड़ों की लागत से तैयार यह तरणताल अब जनता के लिए दुविधा और भय का कारण बन गया है। बिना उचित तकनीकी जांच और सुरक्षा ऑडिट के इसका संचालन मासूमों की जान जोखिम में डाल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर का दावा करने वाले इस पूल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होना प्रबंधन की घोर लापरवाही है। फिलहाल दोनों बच्चों को 24 घंटे के ऑब्जर्वेशन में रखने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है, किंतु इस घटना ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है।
