महाकाल की नगरी में बड़ा फैसला: इंदौर का स्वच्छता मॉडल देश भर में होगा लागू, सिंहस्थ को जीरो वेस्ट बनाने का संकल्प

उज्जैन, अग्निपथ। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में देश के विकास और स्वच्छता को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी में हुई इस बैठक में कई महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी दी गई।

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के इंदौर शहर ने स्वच्छता के मामले में पूरे देश में अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान बनाई है। अब इंदौर के इसी सफल स्वच्छता मॉडल को पूरे देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में पूरी तरह लागू किया जाएगा।

पंद्रह अगस्त तक लगेंगे बीस करोड़ स्मार्ट मीटर

केंद्रीय मंत्री ने देश में बिजली सुधारों को लेकर चल रहे कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि अगले साल पंद्रह अगस्त से पहले पूरे देश में बीस करोड़ नए स्मार्ट मीटर लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। इस महाअभियान के तहत अकेले मध्य प्रदेश में एक करोड़ से अधिक नए स्मार्ट मीटर लगाए जाने की योजना है।

उन्होंने यह भी साफ किया कि बिजली चोरी रोकने और पारदर्शी व्यवस्था के लिए सबसे पहले सभी सरकारी विभागों में प्रीपेड मीटर अनिवार्य रूप से लगाए जाएंगे। सरकारी दफ्तरों के बाद इस नई व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से राज्य के सभी बड़े बिजली उपभोक्ताओं के परिसरों में भी लागू किया जाएगा।

महाकुंभ सिंहस्थ को जीरो वेस्ट बनाने का लक्ष्य

इस महत्वपूर्ण बैठक में साल दो हजार अट्ठाईस में उज्जैन में आयोजित होने वाले दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक मेले सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर भी बेहद गंभीर और लंबी चर्चा की गई। केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर इस बार के भव्य सिंहस्थ महाकुंभ को पूरी तरह से कचरा मुक्त यानी जीरो वेस्ट मेला बनाने का एक बड़ा और ऐतिहासिक लक्ष्य निर्धारित किया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ मेले की व्यवस्थाओं को विश्वस्तरीय बनाने के लिए भारत सरकार के मंत्री खुद दिल्ली से अपने उच्च अधिकारियों की पूरी टीम के साथ यहां आए हैं। सरकार की योजना ऐसी है कि इस मेले के लिए जो भी बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा, उसका लाभ प्रदेश को सिंहस्थ के बाद भी कई दशकों तक मिलता रहेगा।

स्वच्छता के लिए छत्तीस सौ करोड़ से ज्यादा का बजट मंजूर

केंद्र सरकार ने राज्य में स्वच्छता अभियानों की गति को और तेज करने के लिए कुल छत्तीस सौ अस्सी करोड़ रुपए की एक विशाल कार्ययोजना को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इस महापरियोजना में भारत सरकार अकेले दो हजार छत्तीस करोड़ रुपए का एक बड़ा और महत्वपूर्ण वित्तीय योगदान दे रही है, जिससे कचरा प्रबंधन के काम को आधुनिक बनाया जाएगा।

राज्य में कुल सत्तावन लाख मीट्रिक टन जमा कचरे के वैज्ञानिक निपटारे का काम भी तेजी से शुरू कर दिया गया है। अब तक इसमें से अड़तालीस लाख मीट्रिक टन से अधिक कचरे का पूरी तरह प्रबंधन किया जा चुका है। इस प्रक्रिया से शहरों के पास मौजूद लगभग पांच सौ नौ एकड़ की कीमती जमीन भूमाफियाओं और कचरे से पूरी तरह मुक्त करा ली गई है।

मुक्त हुई जमीन पर विकसित होंगे बड़े ऑक्सीजन ज़ोन

कचरा प्रबंधन के जरिए जो पांच सौ नौ एकड़ जमीन खाली कराई गई है, सरकार उसका उपयोग पर्यावरण को सुधारने के लिए करेगी। इसमें से सौ एकड़ से अधिक की चिन्हित भूमि पर बड़े पैमाने पर सघन पौधरोपण किया जाएगा। इन जमीनों को पूरी तरह से हरा-भरा कर शहरों के बीचों-बीच नए और सुंदर ऑक्सीजन ज़ोन के रूप में विकसित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ओंकारेश्वर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कार्यक्रम में शामिल होने और इंदौर एयरपोर्ट पर उन्हें विदाई देने के बाद शाम करीब चार बजे उज्जैन पहुंचे थे। इसके बाद दोनों नेताओं ने शाम को प्रशासनिक संकुल भवन में आयोजित दो अलग-अलग महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लिया और देर रात भगवान महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद भी लिया।

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