50 किलोमीटर की दूरी में 7 बांधों की श्रृंखला: कुड़ेल नदी पर बोरदिया डैम का काम पूरा

बोरदिया डैम

पूर्व विधायक शेखावत का 22 साल पुराना सपना सच

नागदा जंक्शन। क्षेत्र की जल समस्या को स्थायी रूप से समाप्त करने और किसानों की समृद्धि के लिए मलेनी-कुड़ेल नदी पर शुरू हुआ महाअभियान अब पूरी तरह धरातल पर उतर चुका है। पूर्व विधायक दिलीपसिंह शेखावत का 28 सितंबर 2004 को देखा गया सपना अब साकार हो गया है, क्योंकि कुड़ेल नदी पर महत्वाकांक्षी बोरदिया डैम का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। इस जल संरचना के तैयार होने से क्षेत्र के भूजल स्तर में अभूतपूर्व सुधार होगा।

बोरदिया डैम का निर्माण पूरा होने के बाद नागदा-खाचरौद विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक शेखावत स्वयं ग्रामीण कार्यकर्ताओं के साथ बांध स्थल पर पहुंचे और जमीनी स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने इस महत्वपूर्ण सौगात के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और उज्जैन-आलोट क्षेत्र के सांसद अनिल फिरोजिया का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है।

4.25 करोड़ की लागत से बना बोरदिया डैम, 300 हेक्टेयर में फैलेगी हरियाली

कुड़ेल नदी पर जल संरक्षण की इस बड़ी परियोजना के तहत 80 मीटर लंबा और 5.3 मीटर ऊंचा कंक्रीट बांध बनकर पूरी तरह तैयार है। जल संसाधन विभाग द्वारा इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए 4 करोड़ 25 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई थी, जिसके तहत निर्माण कार्य अब अंतिम चरण को पार कर चुका है।

इस नए बांध के बैकवाटर के कारण नदी में लगभग 4 से 5 किलोमीटर की लंबाई तक पानी का विशाल भराव बना रहेगा। बांध की कुल जल भंडारण क्षमता 1 एमसीएफटी (मिलियन क्यूबिक फीट) आंकी गई है, जिससे आसपास के इलाकों का जलस्तर सुधरेगा और सीधे तौर पर 300 हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि भूमि की सिंचाई का रकबा बढ़ जाएगा।

आजादी के बाद 70 साल में बने सिर्फ दो बांध, शेखावत के कार्यकाल में स्वीकृत हुए 5 बड़े प्रोजेक्ट

मलेनी और कुड़ेल बेहद छोटी नदियां हैं, लेकिन इन पर सुनियोजित तरीके से 50 किलोमीटर के दायरे में अब 7 बांधों की एक मजबूत श्रृंखला खड़ी कर दी गई है। देश की आजादी के शुरुआती 70 वर्षों में इस क्षेत्र में केवल दो बांधों का निर्माण हो पाया था, जिसमें ऊँचाहेड़ा डैम रेलवे द्वारा और लोहचितारा डैम पूर्व सांसद डॉ. सत्यनारायण जटिया की निधि से बना था।

इसके बाद वर्ष 2013 से 2018 के बीच तत्कालीन विधायक दिलीपसिंह शेखावत के विशेष प्रयासों से पांच नए बांधों की मंजूरी मिली। इनमें पहला बांध नाथूखेड़ी (आलोट विधानसभा) में बना। इसके बाद गोठड़ा माताजी के निचले हिस्से में 361.30 लाख की लागत से बांध बना, जिसने 210 हेक्टेयर भूमि को सिंचित किया। तीसरा बांध गोठड़ा माताजी के ऊपरी हिस्से में 507.50 लाख की लागत से तैयार हुआ, जिससे 290 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई शुरू हुई। चौथा बांध ब्राह्मणखेड़ी में 168.78 लाख की लागत से बना, जो 165 हेक्टेयर में हरियाली ला रहा है।

कांग्रेस सरकार के आते ही खटाई में पड़ा काम, तत्कालीन पीएस मिश्रा की मदद से दोबारा कराया जीवित

श्रृंखला के पांचवें बांध यानी बोरदिया डैम की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खाचरौद और नवोदय के सार्वजनिक कार्यक्रमों में की थी। इसके बाद 25 नवंबर 2017 को मुख्यमंत्री कार्यालय से विशेष नोटशीट जारी हुई और 16 मई 2018 को शासन ने बांध की साध्यता स्वीकार करते हुए जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता को इसकी डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाने के सख्त निर्देश जारी किए।

वर्ष 2019 में मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस की सरकार आते ही यह पूरा प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद वर्ष 2020 में दोबारा भाजपा की सरकार बनने पर शेखावत ने इस परियोजना को पुनर्जीवित करने के लिए मुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री को सैकड़ों पत्र लिखे और भोपाल के विभागों में लगातार पैरवी की।

डीपीआर बनने के बाद तकनीकी अधिकारियों ने आपत्ति जताई थी कि बोरदिया डैम की निर्माण लागत बहुत अधिक है और उसकी तुलना में सिंचाई का रकबा कम है। अफसरों का कहना था कि यह प्रस्ताव कैबिनेट या विभागीय बैठक में आते ही निरस्त हो जाएगा। इसके बाद शेखावत ने तत्कालीन पीएस (प्रमुख सचिव) एस.एन. मिश्रा से व्यक्तिगत मुलाकात कर फाइल को वापस उज्जैन भिजवाया, कमियों को सुधरवाया और मार्च 2025 में इसका काम शुरू करवाकर इसे मुकाम तक पहुंचाया।

50 से अधिक गांवों को सीधा लाभ

मलेनी और कुड़ेल नदी पर बने बोरदिया डैम सहित इन 7 बांधों की बदौलत नागदा-खाचरौद क्षेत्र की पूरी भौगोलिक स्थिति बदल गई है। पिछले कुछ वर्षों में लगातार किए गए इन भागीरथी प्रयासों से पूरे क्षेत्र में लगभग 1500 हेक्टेयर भूमि का सिंचाई रकबा बढ़ चुका है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में भारी सुधार दर्ज किया गया है।

इस पूरे बेल्ट में जमीन का वाटर लेवल जो कभी 1000 फीट से भी अधिक नीचे पाताल में चला गया था, वह अब इन बांधों में पानी रुकने के कारण काफी ऊपर आ गया है। जलस्तर सुधरने से क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों के कुएं और ट्यूबवेल दोबारा रिचार्ज हो गए हैं और किसानों को सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिलने लगा है।

3 फसलें ले रहे हैं इलाके के किसान, कृषि समृद्धि से ग्रामीण युवाओं को गांवों में ही मिला रोजगार

कुड़ेल नदी पर बोरदिया डैम का काम पूरा होने से अब रूनखेड़ा, बोरदिया, थडोदा, दिपाखेड़ी, खंडवा, बटलावदी, नरेडीपाता, नरेडी हनुमान, पानवासा, भांडला, बेहलोला और घुड़ावन जैसे दर्जन भर से अधिक गांवों के किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। पानी की उपलब्धता के कारण अब इन गांवों के किसान साल में तीन फसलें आसानी से ले पा रहे हैं।

शेखावत ने स्पष्ट किया कि रूनखेड़ा, बोरदिया, ब्राह्मणखेड़ी सहित कई गांवों की जनता और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उन्हें बोरदिया डैम निर्माण के लिए लगातार प्रेरित किया। इस सामूहिक प्रयास का नतीजा है कि आज 50 किलोमीटर लंबी नदी पानी से लबालब है। संपन्नता बढ़ने से किसानों ने कृषि क्षेत्र में स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं।

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