आंधी-बारिश से पहले ही वल्लभ नगर ग्रिड फेल, मोहन नगर सहित 5 वार्डों में दिनभर में 17 बार गुल हुई बिजली

उज्जैन, अग्निपथ। मानसूनी बारिश की दस्तक से पहले ही शहर की बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। वल्लभ नगर बिजली ग्रिड की लचर कार्यप्रणाली के कारण सोमवार को भीषण उमस के बीच मोहन नगर सहित आसपास के पांच वार्डों के हजारों नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सोमवार दोपहर 3 बजे के बाद से इन इलाकों में बिना किसी पूर्व सूचना के रिकॉर्ड 17 बार बिजली गुल हुई। प्री-मानसून की हल्की हलचल शुरू होते ही ग्रिड बंद होना और बार-बार ट्रिपिंग की समस्या आना अब इस क्षेत्र की परमानेंट पहचान बन चुकी है।

जम्फर और डीपी का बहाना, एक फाल्ट पर पूरे इलाके में अंधेरा

वल्लभ नगर ग्रिड के अंतर्गत आने वाले वार्ड क्रमांक 3, 4, 6 और 7 के रहवासी अघोषित कटौती से सबसे ज्यादा त्रस्त हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि किसी एक जगह तकनीकी खराबी आने पर पूरे फीडर की सप्लाई बंद कर दी जाती है।

परेशान उपभोक्ता जब भी शिकायत के लिए ग्रिड के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करते हैं, तो उन्हें हर बार नया बहाना थमा दिया जाता है। कर्मचारियों द्वारा कभी डीपी जलने तो कभी मुख्य लाइन का जम्फर टूटने की घिसी-पिटी दलीलें देकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।

असिस्टेंट इंजीनियर ने साधी चुप्पी, राजनैतिक रसूख के कारण मनमानी

इस पूरे ग्रिड की कमान जब से असिस्टेंट इंजीनियर आयुषी जैन ने संभाली है, तब से क्षेत्र में बिजली की समस्या और ज्यादा गंभीर हो गई है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि संकट के समय कोई भी जिम्मेदार अधिकारी जनता को सही जवाब देने के लिए उपलब्ध नहीं रहता है।

ग्रिड प्रभारी द्वारा उपभोक्ताओं के फोन नहीं उठाने से नाराज लोगों का कहना है कि राजनैतिक शह होने के कारण अधिकारी अपनी मनमानी पर उतारू हैं। वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के मौन रवैये के चलते बिजली कंपनी के मैदानी अमले पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है।

मेंटेनेंस के नाम पर गर्मी में भी की कटौती, अब बारिश में बढ़ी आफत

ऐसा नहीं है कि बिजली गुल होने का यह सिलसिला सिर्फ प्री-मानसून के दौर में शुरू हुआ हो। बिजली विभाग ने मार्च से मई तक भीषण गर्मी के दौरान भी मेंटेनेंस और पेड़-पौधों की छंटाई के नाम पर घंटों अघोषित शटडाउन लेकर लोगों को जमकर छकाया था।

लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी ग्रिड की मेंटेनेंस व्यवस्था आज पूरी तरह ध्वस्त होने की कगार पर खड़ी है। पहली ही बारिश में विभाग के दावों की पोल खुल गई है, जिससे आने वाले मुख्य मानसून सत्र को लेकर उपभोक्ताओं में भारी डर बना हुआ है।

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