उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध रामघाट पर मां शिप्रा की संध्या आरती में शामिल होने वाले हजारों श्रद्धालुओं को इन दिनों भारी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा अचानक लिए गए एक फैसले के कारण अब श्रद्धालुओं को पवित्र घाट की ठंडी और नंगे पत्थरों वाली जमीन पर बैठकर आरती देखने को मजबूर होना पड़ रहा है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने यहां सालों से चली आ रही दरी-गद्दों की बिछात व्यवस्था पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इतना ही नहीं, घाटों पर लगे लाउडस्पीकर और माइक भी जबरन निकलवा दिए गए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में आम श्रद्धालुओं और स्थानीय तीर्थ पुरोहितों के बीच गहरा असंतोष और आक्रोश पनप रहा है।
सनातन परंपरा पर प्रहार: माइक और बिछात हटने से तीर्थयात्री परेशान
अब तक रामघाट पर पंडे-पुजारियों द्वारा देश-विदेश से आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए दरी बिछाई जाती थी, ताकि वे सम्मान और सुगमता से बैठकर मां शिप्रा की दिव्य आरती का लाभ ले सकें। साथ ही, लाउडस्पीकर के माध्यम से मंत्रोच्चार, पूजन विधि और सामूहिक संकल्प की जानकारी दी जाती थी।
प्रशासन की इस एकतरफा कार्रवाई के बाद अब श्रद्धालु जमीन पर बैठने को विवश हैं और पुजारी बिना माइक के ही पूजन संपन्न करा रहे हैं। उज्जैन के तीर्थ पुरोहित पंडित हिमांशु शुक्ल ने इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि प्रशासन का यह कृत्य सनातन धर्म की स्थापित परंपराओं पर सीधा प्रहार है।
आपसी झड़प का ठीकरा भक्तों पर: वायरल वीडियो के बाद आनन-फानन में एक्शन
इस विवाद की शुरुआत पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो से हुई थी, जिसमें शिप्रा घाट पर कुछ लोगों के बीच जमकर मारपीट होती दिख रही थी। शुरुआती दौर में यह अफवाह फैलाई गई कि आरती कराने वाले पंडे-पुजारियों ने बाहर से आए श्रद्धालुओं के साथ अभद्रता और मारपीट की है।
मामले की जमीनी हकीकत पूरी तरह अलग निकली, क्योंकि यह हिंसक टकराव दरअसल कुछ पंडितों और घाट पर अवैध रूप से प्रतिबंधित पूजन सामग्री बेचने वाले असामाजिक तत्वों के बीच हुआ था। इसमें किसी भी आम श्रद्धालु के साथ मारपीट की बात पूरी तरह गलत साबित हुई है।
जांच के बिना अंधाधुंध कार्रवाई: आस्था को ठेस पहुंचाने से भड़के पुरोहित
वीडियो के भ्रामक प्रचार से दबाव में आए प्रशासनिक अधिकारियों ने बिना किसी गहन जांच-पड़ताल के सीधे आरती स्थलों पर धावा बोल दिया। अधिकारियों ने सभी आयोजन समितियों को भीड़ न जुटाने, जमीन पर दरी न बिछाने के निर्देश देकर उनके साउंड सिस्टम जब्त कर लिए।
इस अंधाधुंध कार्रवाई से मां शिप्रा के दर्शन करने आ रहे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। घाट पर मौजूद भक्तों का कहना है कि पवित्र स्थल पर बैठने की उचित व्यवस्था करना या शांतिपूर्वक मंत्रोच्चार करना कोई अपराध नहीं है, जिसे प्रशासन बंद कराना चाहता है।
नि:शुल्क सेवा पर उठ रहे सवाल: पंडा समिति ने प्रशासन को घेरा
राठौर की छतरी के सामने नियमित आरती का संचालन करने वाले श्री क्षेत्र पंडा समिति के अध्यक्ष पंडित राजेश त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि घाट पर होने वाली महाआरती पूरी तरह नि:शुल्क और जन-कल्याण के लिए आयोजित की जाती है। संस्था द्वारा किसी भी श्रद्धालु से किसी प्रकार के शुल्क की मांग नहीं की जाती।
उन्होंने बताया कि यदि कोई श्रद्धालु अपनी स्वेच्छा से दान-पुण्य करता है, तो वह पूरी तरह स्वतंत्र है। इसके विपरीत, पुरोहित समाज तो लगातार आने वाले भक्तों को क्षिप्रा नदी के जल को स्वच्छ रखने और उसमें प्लास्टिक या अपशिष्ट सामग्री विसर्जित न करने का संकल्प दिलाता आ रहा है।
अवैध वेंडर्स का आतंक: श्रद्धालुओं को जबरन परेशान करने का खेल
घाटों पर विवाद की मुख्य वजह यहां अवैध रूप से घूम रहे हार-फूल और पूजन सामग्री बेचने वाले वेंडर्स हैं। ये लोग चलती आरती के दौरान भीड़ में घुसकर श्रद्धालुओं से अभद्रता करते हैं और उन पर जबरन महंगी सामग्री खरीदने का दबाव बनाकर मोटी रकम वसूलते हैं।
जब स्थानीय पंडे-पुजारी इन तत्वों को श्रद्धालुओं से दूर रहने की चेतावनी देते हैं, तो ये वेंडर्स सीधे मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। पिछले दिनों हुए विवाद में भी इन अवैध वेंडर्स ने पहले पंडितों पर हमला किया और बचाव में की गई जवाबी कार्रवाई का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भ्रामक रूप से प्रसारित कर दिया।

