धार्मिक स्थलों और प्रभावित मकानों की चुनौती के बीच नगर निगम और प्रशासन की टीम ने निकाली विकास की राह
उज्जैन, (अभिमन्यु सिंह चंदेल) अग्निपथ। पुराने उज्जैन की गलियां केवल रास्ते नहीं हैं, वे शहर की जीवंत स्मृतियां हैं। यहां हर मोड़ पर इतिहास रचा गया है, हर गली में सदियों पुरानी परंपराएं रची-बसी हैं और हर मार्ग से लाखों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था जुड़ी हुई है। ऐसे शहर के सबसे जटिल और घनी आबादी वाले हिस्से में चौड़ी सड़क का निर्माण करना केवल एक इंजीनियरिंग का कार्य नहीं था, बल्कि विकास की गति को बनाए रखते हुए उज्जैन की पौराणिक पहचान को सुरक्षित रखने की एक कठिन परीक्षा थी।
यही परीक्षा सिंहस्थ-2028 की भव्य तैयारियों के बीच नगर निगम और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम के सामने थी। वी.डी. क्लॉथ मार्केट चौराहा से छोटे शिप्रा पुल तक 1640 मीटर लंबे चौड़ीकरण कॉरिडोर को एक सुनियोजित और चरणबद्ध रणनीति के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संकल्प के अनुरूप इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासनिक समन्वय, अत्याधुनिक तकनीकी योजना और निरंतर मैदानी निगरानी के साथ दिन-रात कार्य किया गया।
330 मीटर से शुरू हुई यात्रा, अब 600 मीटर का चरण भी पूरा
पुराने शहर के इस चुनौतीपूर्ण चौड़ीकरण कॉरिडोर को अलग-अलग चरणों में विभाजित कर पूरा किया जा रहा है। परियोजना के प्रथम खंड में वी.डी. क्लॉथ मार्केट चौराहा से तेलीवाड़ा तक 330 मीटर हिस्से का कार्य सफलता पूर्वक पूर्ण किया गया। यह क्षेत्र निर्माण की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील था, जहां 72 मकान और 2 धार्मिक स्थल प्रभावित हो रहे थे।
इसके पश्चात परियोजना के द्वितीय चरण में 600 मीटर लंबे हिस्से का कायाकल्प भी पूरा कर लिया गया है। वर्तमान में सत्यनारायण मंदिर से आगे लगभग 300 मीटर हिस्से पर तेजी से निर्माण कार्य प्रगति पर है। यदि प्राकृतिक बाधाएं या बारिश आड़े नहीं आती हैं, तो यह हिस्सा भी आगामी पांच दिनों में पूरी तरह तैयार हो जाएगा। यह मार्ग केवल दैनिक यातायात का साधन नहीं है, बल्कि भगवान महाकाल की पारंपरिक सवारी का प्रमुख पथ है। अतः 3 अगस्त को निकलने वाली पहली महाकाल सवारी से पूर्व संपूर्ण व्यवस्था को सुदृढ़ करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
326 मकानों के बीच निकाली विकास की नई राह
इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती मात्र सड़क का निर्माण करना नहीं था, अपितु पुराने शहर की सघन संरचनाओं के मध्य से विकास का सुगम रास्ता बनाना था। तेलीवाड़ा से छोटे शिप्रा पुल तक के संवेदनशील खंड में कुल 326 मकान प्रभावित हो रहे थे। घनी आबादी, व्यस्त व्यावसायिक बाजार, प्राचीरनुमा संरचनाएं और कई धार्मिक स्थलों के मध्य कार्य की गति बनाए रखने के लिए चरणबद्ध रणनीति अपनाई गई। सड़क निर्माण के साथ-साथ भूमिगत नाली, जलापूर्ति नेटवर्क, विद्युत व्यवस्था तथा अन्य बुनियादी अधोसंरचनात्मक कार्यों को भी पूर्ण समन्वय के साथ पूरा किया गया।
कमरीमार्ग चौराहा: कॉबलस्टोन से सजेगा 100 फुट से बड़ा भव्य स्वरूप

परियोजना का एक और प्रमुख आकर्षण कमरीमार्ग चौराहा है, जिसे अभूतपूर्व भव्यता प्रदान की जा रही है। यह चौराहा अब 100 फुट से भी अधिक चौड़ा और विशाल रूप ले लेगा। इसे ऐतिहासिक और आकर्षक स्वरूप देने के लिए कॉबलस्टोन (विशेष पथरीले ब्लॉक) से तैयार किया जा रहा है। कॉबलस्टोन का उपयोग न केवल चौराहे की सुंदरता में निखार लाएगा, बल्कि भारी यातायात और महाकाल सवारी के दौरान श्रद्धालुओं के आवागमन को भी सुचारू बनाए रखेगा।
आस्था के केंद्र, जिन्हें पूर्ण सम्मान के साथ संभाला गया
पुराने उज्जैन के इस ऐतिहासिक मार्ग पर विकास कार्यों के साथ-साथ जन-आस्था का संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी और संवेदनशील जिम्मेदारी थी। चौड़ीकरण की प्रक्रिया के दौरान काले-गोरे भैरव, मजार ढाबा रोड, ढाबेश्वरी माताजी तथा ग्यारहवीं जमात की मस्जिद को पूर्ण सम्मान के साथ पीछे शिफ्ट किया गया। वहीं, क्षेत्र की सांस्कृतिक व धार्मिक पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों जैसे श्री नाथ जी हवेली और अति प्राचीन सत्यनारायण मंदिर को सुरक्षित रखते हुए पूरी निर्माण प्रक्रिया को संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ाया गया।
परियोजना: एक नज़र में
- मार्ग: वी.डी. क्लॉथ मार्केट चौराहा से छोटे शिप्रा पुल तक
- कुल लंबाई: 1640 मीटर
- कुल लागत: रुपये 21.45 करोड़
- पहला खंड: वी.डी. क्लॉथ मार्केट चौराहा से तेलीवाड़ा (330 मीटर पूर्ण, 72 मकान व 2 धार्मिक स्थल प्रभावित)
- दूसरा खंड: 600 मीटर कार्य पूर्ण
- वर्तमान स्थिति: सत्यनारायण मंदिर से आगे 300 मीटर पर कार्य जारी
- विशेष आकर्षण: कमरीमार्ग चौराहा 100 फुट से बड़ा, कॉबलस्टोन से निर्माण
आस्था के केंद्र: सम्मान और सुरक्षा
पीछे शिफ्ट किए गए स्थल:
- काले-गोरे भैरव
- मजार ढाबा रोड
- ढाबेश्वरी माताजी
- ग्यारहवीं जमात की मस्जिद
सुरक्षित व संरक्षित स्थल:
- श्री नाथ जी हवेली
- अति प्राचीन सत्यनारायण मंदिर

