उज्जैन, अग्निपथ। आय से अधिक संपत्ति के बहुचर्चित मामले में विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) उज्जैन ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने तत्कालीन परिवहन निरीक्षक सेवाराम खांडेकर को दोषी ठहराते हुए 4 वर्ष के सश्रम कारावास और 60 लाख रुपये के भारी-भरकम अर्थदंड की सजा सुनाई है। 31 अगस्त 2026 को सुनाए गए इस फैसले के तुरंत बाद दोषी पूर्व अधिकारी को भेरूगढ़ जेल भेज दिया गया। अर्थदंड न चुकाने की स्थिति में आरोपी को 1 वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
वैध आय से 572 प्रतिशत अधिक मिली संपत्ति
लोकायुक्त की विशेष पुलिस स्थापना द्वारा वर्ष 2011 में दर्ज अपराध क्रमांक 122/2011 के तहत यह कार्रवाई की गई है। आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1ई) और 13(2) का दोषी पाया गया। विस्तृत विवेचना के दौरान सामने आया कि आरोपी की सेवा अवधि के दौरान कुल वैध आय 27,37,628 रुपये थी, जबकि उसके द्वारा किया गया कुल व्यय और अर्जित संपत्ति 1,84,15,129 रुपये पाई गई। यह उसकी प्रामाणिक आय से 572 प्रतिशत अधिक थी, जिसका वह कोई संतोषजनक हिसाब नहीं दे सका।
अलकनंदा नगर स्थित मकान पर पड़ा था छापा
मामले की पृष्ठभूमि 11 नवंबर 2011 से जुड़ी है, जब लोकायुक्त पुलिस भोपाल की टीम ने उप पुलिस अधीक्षक ओपी सागोरिया के नेतृत्व में आरोपी के उज्जैन स्थित अलकनंदा नगर वाले निवास पर तड़के छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान आरोपी के घर से बड़ी मात्रा में नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और विलासिता का सामान बरामद हुआ था। बाद में उप पुलिस अधीक्षक एस.एस. उदावत ने मामले की गहन विवेचना कर 30 अगस्त 2014 को विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र दाखिल किया था।
लंबी सुनवाई के बाद मिली कड़ी सजा
अदालत में चले लंबे विचारण के बाद साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को भ्रष्टाचार का दोषी पाया। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनोज पाठक और डी.डी.पी संजय मीणा ने प्रभावी पैरवी की, जिसमें आरक्षक संजीव कुमारिया ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

